Indore Water Contamination Deaths: इंदौर में दूषित पानी से हुई 18 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है. इस गंभीर घटना पर बयानबाजी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा. खंडवा से बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के बयान पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि ऐसी सत्ता को कुर्सी पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है.
दूषित पानी से मौतें, प्रशासन पर सवाल
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण 18 निर्दोष लोगों की जान चली गई. यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सत्ता की असंवेदनशीलता का नतीजा है. जनता ने बार-बार चेतावनी दी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई.
सांसद का बयान और विवाद
बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि “सब कुछ सरकार ही क्यों करे, जनता की भी जिम्मेदारी बनती है.” यह बयान पीड़ित परिवारों के दर्द पर सवाल उठाने जैसा माना जा रहा है. इस वक्त जब लोगों की जान गई है, ऐसे बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया.
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अरुण यादव का पलटवार
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कहा कि जब सरकार सुरक्षित पानी तक नहीं दे सकती और मौतों के बाद भी जवाबदेही से बचती है, तो ऐसी सत्ता को कुर्सी पर बने रहने का अधिकार नहीं है. उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की.
इंदौर की छवि पर सवाल
इंदौर पिछले आठ सालों से देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है. लेकिन दूषित पानी से हुई मौतों ने इस छवि पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. स्वच्छता के दावों के बीच यह घटना शहर की वास्तविकता को उजागर करती है. सांसद पाटिल ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि दोषियों पर कार्रवाई हुई है और आगे भी होगी. उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी को बख्शा नहीं जाएगा.
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