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साल के पहले दिन बाबा महाकाल का राजसी श्रृंगार,भस्म आरती के चलित दर्शन ही कर सके श्रद्धालु 

Baba Mahakal: नए वर्ष की शुरुआत पर गुरूवार तड़के पंडे पुजारियों ने मंदिर के पट खोलकर गर्भगृह में सभी देवी- देवताओं की पूजा की.

साल के पहले दिन बाबा महाकाल का राजसी श्रृंगार,भस्म आरती के चलित दर्शन ही कर सके श्रद्धालु 

Baba Mahakal Mandir Ujjain: मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में नए वर्ष की पहली भस्म आरती काफी विशेष रही गुरूवार तड़के हुई भस्म आरती के दर्शन के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे, लेकिन उन्हें चलित दर्शन से संतुष्ट होना पड़ा. वहीं आज बाबा का राजसी श्रृंगार किया गया.

नए वर्ष की शुरुआत पर गुरूवार तड़के पंडे पुजारियों ने मंदिर के पट खोलकर गर्भगृह में सभी देवी- देवताओं की पूजा की. फिर बाबा महाकाल का जलाभिषेक और पंचामृत से स्नान कर "हरि ओम" का उच्चारण करते हुए जल चढ़ाया. इसके बाद भांग, चंदन और बेल पत्र चढ़ाकर राजा स्वरूप में मुण्डमाल, शेषनाग का मुकुट, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित फूलों से भव्य श्रृंगार किया. फिर आरती कर ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की. इसके बाद धार्मिक मान्यतानुसार भस्म अर्पण के बाद बाबा ने निराकार से साकार रूप में दर्शन दिए. जय महाकाल और हर-हर महादेव लगाए जयकारो से मंदिर गूंज उठा.

चलित भस्म आरती दर्शन

नए वर्ष की शुरुआत बाबा महाकाल के आशीर्वाद से करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार से शहर पहुंचने लगे थे. यही वजह है कि 1 जनवरी को हुई भस्म आरती के सिर्फ चलित दर्शन व्यवस्था होने के बावजूद बड़ी संख्या ने श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर पहुंच गए और बिना रुके दर्शन कर चलते रहे,जिससे तय संख्या से अधिक लोगों ने दर्शन कर लिए. 

सिर्फ आशीर्वाद के लिए दर्शन 

महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि बाबा का पंचामृत अभिषेक कर राजसी श्रृंगार किया. अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से देश में काफी संख्या में लोग नया साल मनाते हैं. पुराना वर्ष अच्छा गुजरा इसके लिए धन्यवाद और नया साल अच्छा रहे इस आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालु 25 दिसंबर से आने लगते हैं. इसीलिए आज  बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती दर्शन के लिए पहुंचे. इस दौरान अन्य मंदिरों में भी काफी भीड़ देखी गई. 

नए साल में ऐसे राजसी श्रृंगार

भस्म आरती से पहले बाबा का जलाभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बनाए पंचामृत से अभिषेक किया. इसके बाद भांग, चंदन, अबीर, कुमकुम, और मेवों (काजू-बादाम) से सजाया। मस्तक पर चांदी का सूर्य/चंद्र, शेषनाग का मुकुट,कानों में नाग कुंडल और रुद्राक्ष,मुण्डमाल व मोगरे की माला धारण करवाई गई. 

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