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Navodaya Admission: नवोदय स्कूल क्लास 6 प्रवेश में EWS को जगह नहीं; हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Navodaya Vidyalaya Admissions: जवाहर नवोदय विद्यालयों की कक्षा 6वीं प्रवेश प्रक्रिया 2026–27 में EWS छात्रों को बाहर रखने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा. केंद्र सरकार और NVS को नोटिस जारी किया गया है.

Navodaya Admission: नवोदय स्कूल क्लास 6 प्रवेश में EWS को जगह नहीं; हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
Navodaya Admission: नवोदय स्कूल क्लास 6 प्रवेश में EWS को जगह नहीं; हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Navodaya Class 6 Admission 2026-27: जवाहर नवोदय विद्यालयों (Jawahar Navodaya Schools) में कक्षा 6वीं सत्र 2026–27 की प्रवेश प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को अवसर न दिए जाने का मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर (High Court of Madhya Pradesh Jabalpur) ने इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार, नवोदय विद्यालय समिति (Navodaya Vidyalaya Samiti) सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की गई है.

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता के अधीवक्ता विकास मिश्रा ने बताया कि यह याचिका एक नाबालिग छात्रा नव्या तिवारी की ओर से उनके अभिभावक धीरज तिवारी द्वारा दायर की गई है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास मिश्रा ने अदालत को बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना का मूल उद्देश्य ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना है, लेकिन वर्तमान प्रवेश नीति में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को पूरी तरह बाहर रखा गया है, जो नीति की भावना के विपरीत है.

आरक्षण व्यवस्था में EWS पूरी तरह बाहर

याचिका में बताया गया है कि नवोदय विद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), ग्रामीण छात्रों, बालिकाओं और दिव्यांग छात्रों के लिए विस्तृत आरक्षण व्यवस्था लागू है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए न तो कोई आरक्षण है और न ही कोई विशेष प्रावधान. इसका सीधा असर यह है कि EWS वर्ग के लाखों प्रतिभाशाली छात्र प्रवेश से वंचित रह जाते हैं.

देशभर में 650 से अधिक नवोदय विद्यालय

देश में इस समय 650 से अधिक जवाहर नवोदय विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें लगभग 2.9 लाख छात्र अध्ययनरत हैं. इनमें SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला हुआ है, लेकिन EWS वर्ग के लिए कोई अलग स्थान या आरक्षण तय नहीं किया गया है.

संविधान के 103वें संशोधन की अनदेखी का आरोप

याचिका में यह भी कहा गया है कि संविधान के 103वें संशोधन (वर्ष 2019) के माध्यम से अनुच्छेद 15(6) जोड़ा गया है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान किया गया है. इसके बावजूद नवोदय विद्यालयों की प्रवेश नीति में EWS वर्ग को शामिल नहीं किया गया, जो संवैधानिक प्रावधानों की खुली अनदेखी है.

एक ही मंत्रालय, लेकिन दो अलग नियम

याचिका में यह विरोधाभास भी उजागर किया गया है कि शिक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित केन्द्रीय विद्यालय संगठन (Kendriya Vidyalaya Sangathan) के स्कूलों में EWS वर्ग के छात्रों को प्रवेश में अवसर दिया जाता है, जबकि उसी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली नवोदय विद्यालय समिति द्वारा संचालित स्कूलों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. इसे भेदभावपूर्ण और असंगत नीति बताया गया है.

सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला

याचिका में हाल ही में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले Atharv Chaturvedi v. State of Madhya Pradesh & Others (10 फरवरी 2026) का हवाला दिया गया है, जिसमें न्यायालय ने EWS छात्रों को अवसर न मिलने को गंभीर मुद्दा मानते हुए राहत प्रदान की थी.सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल उपस्थित हुए थे.

हाईकोर्ट की सख्ती, केंद्र से जवाब तलब

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. अदालत का कहना है कि यह मामला शिक्षा में समानता और समान अवसर से सीधे जुड़ा हुआ है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

लाखों छात्रों की उम्मीदें टिकीं कोर्ट के फैसले पर

इस मामले का असर देशभर के उन लाखों आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर पड़ेगा, जो नवोदय विद्यालयों में पढ़ने का सपना देखते हैं. अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के आगामी निर्देशों और केंद्र सरकार के जवाब पर टिकी हुई हैं.

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