Singrauli Education Scam: सिंगरौली का शिक्षा विभाग इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है. बच्चों के भविष्य को संवारने वाला यह विभाग अब करोड़ों रुपये की संदिग्ध खरीदी, वित्तीय गड़बड़ियों और लोकायुक्त की FIR को लेकर सवालों में घिर गया है. दस्तावेज सामने आने के बाद पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं और अब यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी बन गया है.
NDTV की रिपोर्ट से खुला मामला
इस पूरे मामले को सबसे पहले एक ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए उजागर किया गया. रिपोर्ट में शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर हुई खरीदी, नियमों की अनदेखी और संदिग्ध भुगतान से जुड़े दस्तावेज सामने आए. मामला सामने आते ही यह चर्चा का विषय बन गया और राज्य स्तर पर हलचल मच गई.
चार सालों में करोड़ों के घोटाले के आरोप
जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर 2022 में एसबी सिंह को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी मिली थी. इसके बाद से विभाग लगातार विवादों में रहा. करीब चार सालों में शिक्षा विभाग पर लगभग 25 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे हैं, जिसने इस पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है.
खरीदी और खर्च पर उठे सवाल
जांच में सामने आया कि जिले की 558 स्कूलों के लिए स्वच्छता और कीटाणुनाशक सामग्री के नाम पर करीब 97 लाख रुपये खर्च दिखाए गए. वहीं 19 स्कूलों में वर्चुअल रियलिटी लैब स्थापित करने के नाम पर लगभग 4.68 करोड़ रुपये खर्च बताए गए. इसके अलावा 61 स्कूलों में बिजली और मरम्मत कार्य के नाम पर करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज किया गया.
जमीनी हकीकत पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिन स्कूलों के नाम पर इतना बड़ा खर्च दिखाया गया, क्या वहां वास्तव में ये सुविधाएं मौजूद हैं? क्या बच्चों को इन योजनाओं का लाभ मिला या फिर यह सब केवल कागजों और फाइलों तक ही सीमित रह गया?
लोकायुक्त जांच में सामने आई अनियमितताएं
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकायुक्त रीवा ने जांच शुरू की और कई अनियमितताएं सामने आईं. टेंडर प्रक्रिया, भुगतान और खरीद में नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं. शिकायतों में CSR, DMF और ICT लैब जैसे मदों में गड़बड़ी और मिलीभगत के आरोप भी शामिल हैं.
FIR दर्ज, अधिकारियों पर आरोप
लोकायुक्त ने अपराध क्रमांक 43/2026 के तहत मामला दर्ज करते हुए कई अधिकारियों को आरोपी बनाया है. प्रभारी DEO सूर्यभान सिंह, सहायक संचालक राजधर साकेत, जिला परियोजना समन्वयक रामलखन शुक्ल और वित्त से जुड़े अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं. जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनमें टेंडर, भुगतान और सप्लाई से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं.
कार्रवाई में देरी पर उठ रहे सवाल
इतनी बड़ी कार्रवाई और FIR दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होना भी सवाल खड़े कर रहा है. एक महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी आरोपी अधिकारी अपने पदों पर बने हुए हैं, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.