MP School Syllabus: मध्य प्रदेश के स्कूलों में अब सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी पढ़ाई जाएगी. यह फैसला मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में लिया गया. बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह मौजूद रहे. इस दौरान सीएम यादव ने कहा- सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए. गुरू सांदीपनि के जीवन पर भी रोचक पुस्तक तैयार की जाए. सीएम ने कहा- कक्षा 8 से 12 में कृत्रिम बुद्धिमता (AI) के कौशल को कैसे जोड़ा जाए, इस पर भी एक कार्य योजना तैयार की जाए.
सबसे पहले जानिए, कौन थे सम्राट विक्रमादित्य?
सम्राट विक्रमादित्य प्राचीन भारत के न्यायप्रिय और एक आदर्श राजा थे. उनकी राजधानी ऐतिहासिक नगरी उज्जैन (अवन्तिका) थी. वे अपनी वीरता, अद्भुत न्याय और प्रजा-कल्याण के लिए पूरे इतिहास में अमर हैं. ईसा पूर्व 57 (57 BCE) में विदेशी आक्रमणकारी शकों को भारत से खदेड़कर उन्होंने 'विक्रम संवत' (हिंदू कैलेंडर) की शुरुआत की थी. उनके दरबार में महाकवि कालिदास और खगोलशास्त्री वराहमिहिर जैसे 'नवरत्न' शामिल थे. 'विक्रम-बेताल' और 'सिंहासन बत्तीसी' की कहानियां उनके अचूक न्याय और बुद्धिमत्ता को दर्शाती हैं. भारतीय संस्कृति में उनका नाम सुशासन और धर्मपरायणता का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है.
एक जुलाई से पहले अतिथि शिक्षकों की भर्ती
बैठक में निर्देश दिए गए कि निजी विद्यालय खोलने के लिए सामाजिक संस्थाओं और संगठनों को प्रोत्साहन दिया जाए. अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक जुलाई से पहले पूरी कर ली जाए. सत्र प्रारंभ होने से पहले स्कूलों में सभी पूर्व तैयारियां कर ली जाएं. प्रदेश की सभी आंशिक जीर्ण-शीर्ण शालाओं की तत्काल मरम्मत करा ली जाए. सभी स्कूलों में बाउंडी वॉल्स बनाई जाए. एक जुलाई से गुरू पूर्णिमा (29 जुलाई) तक "शिक्षक वंदना कार्यक्रम", अभिभावकों व जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित किया जाए.
स्कूलों में पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन कराए जाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- मध्यप्रदेश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारी सरकार सांदीपनि विद्यालय जैसी अत्याधुनिक शालाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराकर प्रदेश की नींव मजबूत कर रही है. प्रदेश के हर विद्यार्थी तक उत्कृष्ट शैक्षणिक सुविधाएं और संसाधन समय पर पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. विभागीय गतिविधियों में तेजी लाएं और 16 जून से प्रारंभ हो रहे शैक्षणिक सत्र से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- स्कूलों में पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन कराए जाएं, ताकि ऐसे विद्यार्थी जो अपने विद्यालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं, वे उस विद्यालय के विकास-विस्तार में कुछ योगदान भी कर सकेंगे.
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स्कूलों का शत-प्रतिशत रिजल्ट, शिक्षकों का होगा सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने परीक्षा परिणामों को और अधिक बेहतर बनाने के लिए शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने, नियमित मॉनीटरिंग, तकनीक और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने के निर्देश भी दिए. सीएम यादव ने कहा- प्रदेश की जिन शालाओं में शत-प्रतिशत रिजल्ट आया है, उनके शिक्षकों का सार्वजनिक सम्मान किया जाएगा. बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 26 शालाएं ऐसी हैं, जहां शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम आया है. यहां के सारे विद्यार्थी उत्तीर्ण हो गए हैं. साीएम ने कहा- इन शालाओं के अतिरिक्त 90 या 95 प्रतिशत से अधिक रिजल्ट देने वाली शालाओं को भी सम्मानित किया जाए. उन्होंने कहा- सांदीपनि विद्यालय की अवधारणा/योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना भी तैयार की जाए.