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MP की पंचायत में खुली लूट, प्रस्ताव पारित कर तय किए कमीशन के रेट, अब हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Proposal for Brokerage in MP Panchyat: ग्राम पंचायत सलारगोंदी में सरपंच, उप सरपंच और पंचों ने विकास कार्यों में अपनी हिस्सेदारी तय करने के लिए एक प्रस्ताव पारित कर दिया है. सरपंच विक्रम प्रसाद ने 10%, उप सरपंच सोनियाबाई ने 7% और पंच नरबदिया बाई ने 5% कमीशन लेने का फैसला किया है.

MP की पंचायत में खुली लूट, प्रस्ताव पारित कर तय किए कमीशन के रेट, अब हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Anuppur Panchyat Fixed Brokerage for Public Work

MP Panchayat: भारत में भ्रष्टाचार को अक्सर चोरी-छिपे अंजाम दिया जाता है, लेकिन प्रदेश के अनूपपुर जिले की एक ग्राम पंचायत में अब इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दे दी गई है, यह कोई मजाक नहीं, बल्कि हकीकत है. दरअसल जिले की एक ग्राम पंचायत में बाकायदा प्रस्ताव पारित कर विकास कार्यों में खर्च होेने वाले पैसोें पर कमीशन के रेट तय किए हैं.

ग्राम पंचायत सलारगोंदी में सरपंच, उप सरपंच और पंचों ने विकास कार्यों में अपनी हिस्सेदारी तय करने के लिए एक प्रस्ताव पारित कर दिया है. सरपंच विक्रम प्रसाद ने 10%, उप सरपंच सोनियाबाई ने 7% और पंच नरबदिया बाई ने 5% कमीशन लेने का फैसला किया है.

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विकास पर कम और इन जनप्रतिनिधियों की जेबें भरने पर ज्यादा खर्च होगा

कहने का अर्थ है कि ग्राम पंचायत का बजट जनता के विकास पर कम और इन जनप्रतिनिधियों की जेबें भरने पर ज्यादा खर्च होगा. इस भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की गई, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंच गया. याचिकाकर्ता सुनील कुमार सोनी ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार सामने आने के बावजूद प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की.

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मामले में हाईकोर्ट ने  गुरुवार को राज्य सरकार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, अनूपपुर कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने 6 हफ्तों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. बडी़ बात यह है कि खबरों में आने के बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई.

सवाल है कि हाई कोर्ट के नोटिस पर प्रशासन और सरकार क्या जवाब देंगे

गौरतलब है यह मामला पंचायत स्तर पर संगठित भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला उदाहरण है. अब सवाल यह है कि हाई कोर्ट के नोटिस पर प्रशासन और सरकार क्या जवाब देंगे और पंचायत के प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई करेंगे? यह आने वाला समय बताएगा कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा? 

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