विज्ञापन
This Article is From May 14, 2025

MP Temple Act 2019: कटघरे में एमपी का मंदिर विधेयक-2019, हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

MP Temple Act News : याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि विधेयक की धारा 46 के अंतर्गत राज्य के लगभग 350 से अधिक मंदिरों को अधिसूचित किया गया और इन मंदिरों को सरकार की ओर से नियंत्रित किया जाता है. इन मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के लिए सरकार की और से बनाई गई नीति में केवल ब्राह्मणों को प्राथमिकता दी गई है, जबकि हिंदू धर्म में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के अनुयायी भी शामिल हैं. लिहाजा, यह संविधान में वर्णित समानता के अधिकार का उल्लंघन है.

MP Temple Act 2019: कटघरे में एमपी का मंदिर विधेयक-2019, हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

MP Temple Act : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court) में मंगलवार को एक जनहित याचिका दाखिल कर यह मांग की गई है कि राज्य सरकार की ओर से संचालित धार्मिक स्थलों पर पुजारी की नियुक्ति में सभी जातियों को समान अवसर दिया जाए. साथ ही याचिका में मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) विनिर्दिष्ट मंदिर विधेयक-2019' की वैधता को भी चुनौती दी गई है.

मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने इस याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य के मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, सामाजिक न्याय विभाग, धार्मिक और धर्मस्व विभाग व लोक निर्माण विभाग को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है.

350 से अधिक मंदिरों को किया गया है अधिसूचित 

यह याचिका अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) के सचिव एमसी अहिरवार की ओर से दायर की गई, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और पुष्पेंद्र शाह ने अदालत में पक्ष रखा. याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि विधेयक की धारा 46 के अंतर्गत राज्य के लगभग 350 से अधिक मंदिरों को अधिसूचित किया गया और इन मंदिरों को सरकार की ओर से नियंत्रित किया जाता है.

इसलिए कानून को दी गई चुनौती

इन मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के लिए सरकार की और से बनाई गई नीति में केवल एक विशेष जाति (ब्राह्मण) को प्राथमिकता दी गई है, जबकि हिंदू धर्म में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के अनुयायी भी शामिल हैं. यह संविधान में वर्णित समानता के अधिकार का उल्लंघन है. याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि पुजारी की नियुक्ति योग्यता के आधार पर होनी चाहिए, न कि जातिगत आधार पर.

यह भी पढ़ें- यहां मेडिकल कॉलेज खोल कर भूल गई सरकार, 5 वर्ष बाद भी डॉक्टरों के 45% पद पड़े हैं खाली

राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अजाक्स एक कर्मचारी संगठन है, जिसे ऐसी याचिका दायर करने का वैधानिक अधिकार नहीं है.

यह भी पढ़ें- खंडवा की जिया ने किया कमाल...सेल्फ स्टडी कर CBSE बोर्ड के 12वीं में गाड़े झंडे, ऐसे हासिल किए 95% अंक

पूरी स्टोरी पढ़ें

MPCG.NDTV.in पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें. देश और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं. इसके अलावा, मनोरंजन की दुनिया हो, या क्रिकेट का खुमार,लाइफ़स्टाइल टिप्स हों,या अनोखी-अनूठी ऑफ़बीट ख़बरें,सब मिलेगा यहां-ढेरों फोटो स्टोरी और वीडियो के साथ.

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com