National Pulses Conference: खेती की योजनाएं अब दिल्ली के एयरकंडीशंड कमरों और कंक्रीट के जंगलों में नहीं, बल्कि खेतों की मिट्टी के बीच बनेंगी. यह बात शनिवार को अमलाहा के इकार्डा में आयोजित राष्ट्रीय दलहन सम्मेलन को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कही. चौहान ने स्पष्ट किया कि कृषि मंत्रालय अब मुख्यालय से नहीं बल्कि गांव की चौपालों से चलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को जमीन पर उतारते हुए उन्होंने देशभर में 55 हजार और मध्य प्रदेश में 1 हजार नई दाल मिलें खोलने का ऐतिहासिक ऐलान किया.
इन किसानों को 10 हजार की सहायता राशि देने का ऐलान
सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को अब विदेशों से दाल मंगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने आइडियल खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर किसान को 10 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी. उन्होंने बताया कि प्रयोगशालाओं में तैयार उन्नत बीजों के जरिए किसान अब साल में तीन बार फसल ले सकेगा, जिससे उसकी आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी.
शरबती और बासमती का पूरी दुनिया में डंका बजेगा
केंद्रीय मंत्री ने सीहोर के गौरव शरबती गेहूं का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी चमक पूरी दुनिया में धूम मचाएगी. साथ ही बासमती चावल और मसालों की खेती को बढ़ावा देकर भारतीय किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ा जाएगा. चौहान ने कहा कि बीज ग्राम और नई प्रयोगशालाओं के माध्यम से प्रयोगशाला और खेत के बीच की दूरी को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा.
सीएम का संकल्प, केंद्र से दो कदम आगे रहेगा मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मेलन में हुंकार भरते हुए कहा कि भोजन की थाली दाल के बिना अधूरी है. उन्होंने संकल्प लिया कि दलहन उत्पादन में मध्य प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार केंद्र के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगी. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनके समय सिंचाई का रकबा महज 7.5 हजार हेक्टेयर था, जो आज 44 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. नदी जोड़ों अभियान ने अन्नदाताओं की तकदीर बदल दी है.
प्रयोगशालाओं का उद्घाटन
बता दें कि आयोजित इस दलहन सम्मेलन के दौरान अतिथियों ने अमलाह में प्लांट जीनोमिक्स, टिश्यू कल्चर और प्लांट पैथोलॉजी जैसी आधुनिक प्रयोगशालाओं का उद्घाटन किया. दलहन मिशन पोर्टल लॉन्च कर किसानों को डिजिटल क्रांति से जोड़ा गया. साथ ही 5 प्रगतिशील किसानों का सम्मान करते हुए उनके द्वारा उपजाई गई फसल की सराहना की गई.
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