MP GSDP: मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़े दावे किए जा रहे हैं. यह दावा एमपी की मजबूत अर्थव्यवस्था को लेकर किया गया है, जो लगातार विकास की राह पर है. अनुमानों के मुताबिक 2026-27 तक अर्थव्यवस्था 18.48 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी. रविवार को जारी सरकारी प्रेस नोट में कहा गया है कि राज्य बजट 2025-26 में किए गए प्रावधानो के चलते अर्थव्यवस्था में तेजी से विस्तार की उम्मीद है.
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2026-27 के अंत तक 44 करोड़ रुपए के राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया है
अधिकारियों ने 2026-27 के अंत तक 44 करोड़ रुपए के राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया है, जो महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं के साथ-साथ राजकोषीय स्थिरता का संकेत देता है. वहीं, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, औद्योगिक गतिविधियों और ग्रामीण विकास पहलों को गति देने के लिए 80,266 करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय का प्रस्ताव किया है, जो GSDP का 4.80 % है. प्रमुख विभागों में आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है.
राज्य बजट 2025-26 में सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है कृषि और किसान कल्याण
गौरतलब है राज्य बजट 2025-26 में कृषि और किसान कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है, जिसके लिए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों हेतु 88,910 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. गैर-बजटीय संसाधनों को मिलाकर, खेती के तरीकों का आधुनिकीकरण करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगभग 1.15 लाख करोड़ उपलब्ध होंगे. वहीं, महिला सशक्तिकरण को प्रमुखता देते हुए 'लाड़ली बहना योजना' के लिए 23,800 करोड़ आवंटित किए गए हैं.
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सामाजिक व आर्थिक उत्थान की योजनाओं के लिए अलग रखे गए हैं 1,83,708 करोड़
वीबी-जीराम जी योजना के लिए 10,400 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपए और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 4,600 करोड़ ,आने वाले सिंहस्थ आयोजन की तैयारियों के लिए 3,000 करोड़, स्वास्थ्य सेवाओं को 23,747 करोड़ के आवंटन के साथ मजबूत किया गया है, जबकि सामाजिक और आर्थिक उत्थान को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के लिए 1,83,708 करोड़ रुपए अलग रखे गए हैं.
ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए बजट में हैं बड़े प्रावधान
राज्य बजट में से 26 प्रतिशत अनुसूचित जनजातियों के लिए और 17 प्रतिशत अनुसूचित जातियों के लिए निर्धारित किया गया है. नई लंबी अवधि की पहलों में तीन वर्षों में 5,000 करोड़ रुपए की द्वारका योजना, स्वामित्व योजना के लिए 3,800 करोड़ रुपए और यशोदा दुग्ध आपूर्ति योजना के लिए 700 करोड़ रुपए शामिल हैं; इन सभी का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं और पशुपालन को बढ़ावा देना है.