भिंड जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने सरकारी गेहूं खरीदी व्यवस्था की बड़ी लापरवाही उजागर कर दी है. मौसम विभाग द्वारा चार दिन पहले ही तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि को लेकर अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद खरीदी केंद्रों पर गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए. नतीजा यह हुआ कि आलमपुर खरीदी केंद्र के बाहर खुले में रखा करीब 3 हजार क्विंटल गेहूं बारिश में भीग गया.
जानकारी के मुताबिक, आलमपुर खरीदी केंद्र पर किसानों से खरीदा गया गेहूं गोदामों में जगह नहीं होने के कारण खुले आसमान के नीचे रखा गया था. कई जगह गेहूं सीधे जमीन पर पड़ा था तो कई स्थानों पर बोरियों में पैक कर रखा गया था, लेकिन उसे ढकने के लिए तिरपाल या किसी अन्य सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम नहीं था. बारिश शुरू होते ही पूरा गेहूं भीग गया और खरीदी व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आ गई.
दरअसल, आलमपुर के जिस वेयर हाउस में यह गेहूं रखा जाना था, उसे पहले गेहूं खरीदी में फर्जीवाड़े के आरोपों के चलते प्रशासन द्वारा सील किया जा चुका है. इस वेयर हाउस में पहले से ही लगभग 2700 क्विंटल गेहूं भरा हुआ है, जिसके कारण नए गेहूं को रखने की कोई जगह नहीं बची. इस कारण खरीदी केंद्र के बाहर खुले में हजारों क्विंटल गेहूं रखा रहा, जो बारिश में भीग गया.

Bhind Wheat Procurement: Wheat Left in Open Spoiled by Rain.
"मेरा इंजीनियर पति गे, शादी के बाद संबंध नहीं बनाए तो हिडन कैमरे लगवाए, Video देख आंखें फटी रह गईं"
ज्यादातर केंद्रों पर खुले में पड़ा गेहूं
यह सिर्फ एक खरीदी केंद्र का मामला नहीं है. पूरे जिले के खरीदी केंद्रों की हालत भी लगभग ऐसी ही है. जिले के 32 खरीदी केंद्रों पर कुल 48 हजार 856 क्विंटल गेहूं परिवहन के इंतजार में पड़ा हुआ है. परिवहन कार्य की धीमी गति को लेकर ट्रांसपोर्टरों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. आलमपुर खरीदी केंद्र से खरीदी शुरू होने के बाद अब तक केवल तीन ट्रक गेहूं का ही उठाव किया जा सका है. मछंड केंद्र पर 6647 क्विंटल, बरौआ केंद्र के बाहर 4179 क्विंटल, ऐहनो केंद्र पर 4084 क्विंटल और अमायन के मेहरा केंद्र पर 1222 क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा हुआ है. मौसम विभाग द्वारा आगे भी मौसम खराब रहने की संभावना जताई जा रही है, ऐसे में दोबारा बारिश होने पर बड़ा नुकसान हो सकता है.
किसान और सरकार दोनों को ही होगा नुकसान
इधर, बारिश के बाद किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. खरीदी केंद्रों पर तुलाई का काम लगभग ठप हो चुका है, क्योंकि केंद्रों पर गेहूं रखने की जगह नहीं बची है. कई किसान पिछले 5 दिन से अपनी उपज की तुलाई का इंतजार कर रहे हैं. किसानों का आरोप है कि बारिश के बाद केंद्र प्रभारी ने तुलाई कराने से इनकार कर दिया, जिससे उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली का भाड़ा और अन्य खर्च भी उठाना पड़ रहा है. किसानों का आरोप है कि यदि समय पर गेहूं का परिवहन किया गया होता तो बारिश से हजारों क्विंटल गेहूं खराब होने से बचाया जा सकता था. गेहूं भीगने से उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ता है. अगर, अन्य खरीदों केंद्रों पर रखा गेहूं भीगा तो किसानों और सरकार दोनों को ही नुकसान होगा.
मामले की जांच जारी, कलेक्टर करेंगे कार्रवाई
गेहूं उठाव में हो रही देरी पर ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि मजदूरों की कमी के कारण लोडिंग नहीं हो पा रही है. वेयर हाउसों में भी तुलाई कांटे कम होने के कारण माल रखने और उतारने में देरी हो रही है. जिला प्रभारी नागरिक आपूर्ति निगम प्रभारी राजेश चौधरी ने कहा कि आलमपुर खरीदी केंद्र पर अचानक बारिश आने से हालात बिगड़ गए थे. पूरे मामले की जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है. जांच के बाद कलेक्टर द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी.