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उज्जैन के वेद संस्थान में फिर विवादों में: सचिव की नियुक्ति पर उठा सवाल, हाईकोर्ट ने चेयरमेन और सचिव को किया तलब

Ujjain Ved Vidya Pratishthan Controversy: उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान एक बार फिर विवादों में आ गया है. दरअसल, सचिव की नियुक्ति को लेकर मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है. इंदौर बेंच ने नोटिस जारी कर 6 सप्ताह में जवाब मांगा है.

उज्जैन के वेद संस्थान में फिर विवादों में: सचिव की नियुक्ति पर उठा सवाल, हाईकोर्ट ने चेयरमेन और सचिव को किया तलब

Maharshi Sandipani Rashtriya Veda Vidya Pratishthan Ujjain: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान एक बार फिर विवादों में घिर गया है. छात्र की छड़ी से पिटाई मामले के बाद अब संस्थान के सचिव विरूपाक्ष जड्डीपाल की नियुक्ति को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है. मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने संस्था के चेयरमेन, वाइस चेयरमेन और सचिव विरूपाक्ष जड्डीपाल सहित अन्य को नोटिस जारी किया है. साथ ही कोर्ट ने सभी पक्षों से 6 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है.

सचिव की नियुक्ति को बताया अवैध

दरअसल वेद प्रतिष्ठान के शिक्षक स्वप्निल पाठक की ओर से याचिका दायर की गई, जिसमें सचिव जड्डीपाल की नियुक्ति को अवैध बताया है. याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट गार्गी पाठक के मुताबिक, 9 जनवरी 2026 को दाखिल इस याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया और नियमों के उल्लंघन को चुनौती देते हुए कहा है कि सचिव पद के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर होना जरूरी है, जबकि जड्डीपाल 2017 में नियुक्ति के समय तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम में एसोसिएट प्रोफेसर थे. बता दे कि हाल ही में छात्र की छड़ी से पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद संस्थान सुर्खियों में आया था.

डेपुटेशन पर भी सवाल

याचिका के अनुसार, जड्डीपाल का डेपुटेशन 2022 में समाप्त हो गया था. इसके बावजूद वो अब तक सचिव पद संभाल रहे हैं. इसके अलावा 15 जून 2023 को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने कथित रूप से नियमों में बदलाव कर 10 जुलाई 2024 से उनकी प्रतिनियुक्ति 5 साल के लिए बढ़ाई, जो केंद्र सरकार के नियमों के खिलाफ है, क्योंकि प्रतिनियुक्ति 7 साल से अधिक बढ़ाने का प्रावधान नहीं है.

गंभीर आरोप भी लगाए गए

याचिकाकर्ता ने सचिव पद के दुरुपयोग, भर्ती में अनियमितताओं, प्रशासनिक गड़बड़ियों और वेद पाठशालाओं के उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं. मांग की गई है कि जड्डीपाल को तत्काल पद से हटाया जाए, क्योंकि वे इस पद के लिए पात्र नहीं हैं. अब इस पूरे मामले में हाईकोर्ट के नोटिस के बाद आने वाला जवाब और अगली सुनवाई अहम मानी जा रही है.

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