बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से सामाजिक कुरुति और प्रताड़ना का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां अंतरजातीय प्रेम विवाह करने की 'सजा' के तौर पर 8 दंपत्तियों को न सिर्फ समाज से बाहर कर दिया गया, बल्कि जिंदा रहते हुए उनका प्रतीकात्मक 'मृत्युभोज' (तीज-नहावन) तक करा दिया गया. इस अमानवीय व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर सभी पीड़ित युवक न्याय के लिए सिविल लाइन थाना और जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे हैं.

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हुक्का-पानी बंद और भारी-भरकम जुर्माना
पीड़ितों द्वारा प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, अंतरजातीय विवाह करने के बाद समाज के कुछ रसूखदार पदाधिकारियों और ठेकेदारों ने उनके परिवारों को समाज से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया है. पीड़ितों का आरोप है कि उनके परिवारों का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया है. शादी-विवाह, मृत्युभोज या किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में उनके शामिल होने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. समाज में वापस लेने के नाम पर उन पर भारी-भरकम जुर्माना भी ठोका गया.
एनडीटीवी से बातचीत में पीड़ितों ने बताया कि "समाज में दोबारा शामिल करने का झांसा देकर कई बार बैठकें बुलाई गईं, लेकिन अंत में हमें स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया गया. समाज के ठेकेदारों द्वारा लगातार दिए जा रहे दबाव और मानसिक प्रताड़ना के कारण हमारे परिवारों का सामान्य जीना दूभर हो गया है."

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प्रशासन और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग
सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहे युवाओं ने बिलासपुर कलेक्टर और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस अमानवीय और क्रूर कृत्य के पीछे जिम्मेदार समाज के पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. पीड़ितों का कहना है कि दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य नवविवाहित जोड़े को इस तरह के मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न का सामना न करना पड़े. फिलहाल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच और उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है.
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