Bandhavgarh Tiger Reserve: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के मामले में NDTV की खबर का फिर से बड़ा असर हुआ है. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) वन मुख्यालय ने गुरुवार को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और शहडोल वन मंडल के उप निदेशक और कुछ अन्य अधिकारियों को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले 3 साल में मारे गए 34 बाघों को लेकर नोटिस जारी किया है.
दरअसल एनडीटीवी की खबर के बाद कई वन्य प्रेमियों ने इस मामले की सीबीआई से भी जांच कराने की मांग की थी. आपको बता दें कि चार अगस्त को एनडीटीवी ने बांधवगढ़ में बाघों की मौत पर खबर प्रकाशित की थी. इस खबर पर भोपाल से लेकर दिल्ली तक हलचल मच गई थी. इसके बाद आनन-फानन में बांधवगढ़ और शहडोल वन परिक्षेत्र में कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया.
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वन मंत्री ने एनडीटीवी के काम को सराहा
मध्य प्रदेश के वन मंत्री रामनिवास रावत ने कहा हमारे संज्ञान में ये पूरा मामला आया था, इसको लेकर केंद्रीय जांच दल भी बुधवार को पहुंचा था, दिन भर केंद्रीय जांच दल वहीं रहा और उन्होंने पूरी जानकारी लेकर रिपोर्ट तैयार कर ली है. केंद्रीय दल इसकी पूरी जानकारी लेकर भी गया है. अब अधिकारियों से बात भी की जाएगी. उन्होंने कहा कि NDTV की टीम को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं,कि उन्होंने हमारे सामने इसको उजागर किया. वन्यजीवों और वन क्षेत्र की बेहतरी के लिए ज़िम्मेदारी के साथ NDTV ने काम किया और आगे भी ऐसे करते रहेंगे, इसकी हमें उम्मीद है.
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एनडीटीवी के हाथ लगी थी वन-विभाग की रिपोर्ट
दरअसल, एनडीटीवी के हाथ वन-विभाग की जो रिपोर्ट लगी थी, वो बताती है कि कैसे पिछले 3 सालों में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में न सिर्फ 34 बाघों की मौत हो गई, बल्कि उसे आपसी लड़ाई बताकर दबाने की कोशिश भी की गई थी. इन मौतों की जांच के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने मार्च 2024 में 3 सदस्यीय कमेटी बनाई थी, इस जांच समिति ने घटना स्थल पर जाकर हर मामले में अवैध शिकार, आपसी लड़ाई और अन्य कारणों के आधार पर जांच की. हर बाघ के मौत का ब्यौरा इस रिपोर्ट में है, जिसकी एक्सक्लूसिव कॉपी एनडीटीवी के पास है. इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य हैं.
वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट ने कही ये बात
इस कार्रवाई के बाद वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि बांधवगढ़ का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु अपने जो उठाया है, वह ये है कि वहां पर परमानेंट डायरेक्टर नहीं है. यही स्थिति भोपाल में भी है. यहां पर भी काफ़ी लंबे समय से चीफ़ वाइल्ड लाइफ़ वार्डन या PCCF वार्डन के पद पर कोई भी फ़ुल टाइम पदस्थ नहीं है. कुल मिलाकर यहां पर लीडरशिप क्राइसिस है. लिहाजा, इस मामले में भी एक्शन की जरूरत है. बांधवगढ़ में बाघों की मौत का जो भी दोषी या आरोपी है. उनके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए, बल्कि शिकारियों के साथ सांठगांठ के मामले में उन के खिलाफ आपराधिक मुक़दमा भी दर्ज होना चाहिए.
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रिपोर्ट बनाने में भी लापरवाही
रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि घटना स्थलों की सुरक्षा के प्रयास अपर्याप्त थे और डॉग स्क्वॉड या मेटल डिटेक्टर तक का उपयोग नहीं किया गया. इसके अलावा सैंपल खराब तरीके से संभाले गए, जिससे कोर्ट केस के दौरान सबूत प्रभावित हुए. कई मामलों में केस डायरी या दस्तावेज तैयार ही नहीं किए गए.
मप्र टाइगर स्टेट है. यहां अकेले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 1000 से ज्यादा कर्मचारी और अफसर तैनात हैं. बावजूद इसके 34 बाघों की मौत हो गई. सूत्र बताते हैं एनडीटीवी की इस रिपोर्ट से वन भवन में काफी हलचल है. जल्द ही कुछ बड़े अफसरों पर भी गाज गिर सकती है.
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