
Madhya Pradesh News: देश के प्रतिष्ठित कॉन्वेंट सिंधिया स्कूल के एक छात्र ने अपनी मेहनत से एक बड़ा कमाल कर दिखाया. उसने एक ऐसा ड्रोन बनाने में कामयाबी हासिल की है जो सामान्य ड्रोन से एकदम अलग है. वह न केवल उड़ता है बल्कि जिसमें एक व्यक्ति बैठकर उड़ सकता है.स्टूडेंट इसका सफल परीक्षण भी कर चुका है.
कड़ी मशक्कत के बाद तैयार हुआ
मध्य प्रदेश के ग्वालियर फोर्ट पर स्थित सिंधिया स्कूल के इस मेधावी छात्र का नाम मेधांश त्रिवेदी है. इस होनहार छात्र ने इसे बनाने में तीन महीने की कड़ी मशक्कत की और करीब साढे़ तीन लाख रुपए की लागत से इस ड्रोन को तैयार किया है.मेधांश ने अपने इस ड्रोन को एमएलडीटी 1 नाम दिया है.
देश के प्रतिष्ठित कॉन्वेंट सिंधिया स्कूल के एक छात्र ने बड़ा कमाल कर दिखाया. उसने एक ऐसा ड्रोन बनाने में कामयाबी हासिल की है जो सामान्य ड्रोन से एकदम अलग है. इस ड्रोन में एक व्यक्ति भी बैठकर उड़ सकता है.#MadhyaPradesh | #Drone | #Student pic.twitter.com/kIPwloIOe3
— NDTV MP Chhattisgarh (@NDTVMPCG) December 6, 2024
छात्र बताता है कि उसने अलग अलग प्लेटफॉर्म पर चीन के ड्रोन देखे थे. उनको देखने के बाद उसके मन में भी कुछ अलग करने का विचार आया .उसने इस पर प्राथमिक काम किया फिर इसकी जानकारी टीचर्स को दी .
मेधांश बताते हैं कि उसे इस ड्रोन को तैयार करने में कई कठिनाइयां भी सामने आईं. लेकिन शिक्षक और परिवार के लोगों की मदद से वह अपने सपने को साकार करने में सफल हुआ है. उन्होंने बताया कि यह ड्रोन 80 किलो के व्यक्ति को लेकर 6 मिनट तक हवा में उड़ सकता है. इस ड्रोन में करीब 45 हॉर्स पावर से ज्यादा की पावर है.
सिंधिया स्कूल की स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय मंत्री और स्कूल के संरक्षक ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं इसरो के सीईओ एस सोमनाथ ने भी स्कूल में आयोजित विज्ञान की विजिट के दौरान मेधांश के इस इनोवेशन की जी खोलकर प्रशंसा की थी. मेधांश ने बताया कि ड्रोन में अगर कोई नही बैठा हो तो यह चार किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है. हालांकि वह इसे सुरक्षा के चलते 10 मीटर तक ही उड़ा रहे हैं. उन्होंने बताया कि जैसे ही उनके पास फंडिंग की व्यवस्था होगी इस ड्रोन को हाइब्रिड मोड पर लॉन्च करने पर काम करेंगे.
उनका कहना है कि आने वाले समय में आम लोगों के काम आने वाले ड्रोन का निर्माण करेंगे जिससे सामान ले जाने के लिए एक व्यक्ति को दूसरी जगह पहुंचाने और एग्रीकल्चर में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा.
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ऐसे मिली है प्रेरणा
मेधांश के शिक्षक मनोज मिश्रा बताते हैं ,कि वह कक्षा 7 से ही कुछ अलग करने के मकसद से उनसे नए-नए आविष्कार के बारे में जानकारी लेता रहता था. वह खुद भी मॉडल तैयार करते हैं. इन मॉडल को देखने के बाद और चीन के मानव ड्रोन को देखने के बाद उसे यह ड्रोन बनाने की प्रेरणा मिली है.
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