विज्ञापन
This Article is From Feb 12, 2026

जिला अस्पताल में सिस्टम फेल, टॉर्च की रोशनी में मरीजों का हो रहा है इलाज

Guna District Hospital News: लापरवाही की तस्वीरें उस वक्त सामने आईं, जब विशेषज्ञ डॉक्टरों को बिना उपकरणों के मरीजों को देखना पड़ा. कान के डॉक्टर को मरीज की जांच मोबाइल की टॉर्च जलाकर करनी पड़ी, जबकि नेत्र विशेषज्ञ बिना मशीनों के केवल अनुभव और अनुमान के आधार पर परामर्श देते नजर आए. मशीनों के अभाव में सटीक जांच संभव नहीं हो सकी, जिससे दूर-दराज से आए मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी.

जिला अस्पताल में सिस्टम फेल, टॉर्च की रोशनी में मरीजों का हो रहा है इलाज
जिला अस्पताल में सिस्टम फेल, टॉर्च की रोशनी में मरीजों का हो रहा है इलाज
Vinod Kushwaha

Guna District Hospital: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का गुना (Guna) जिला अस्पताल प्रबंधन की अदूरदर्शी योजना और विभागीय तालमेल की कमी ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोर कड़ियों को उजागर कर दिया है. दरअसल, नवनिर्मित क्रिटिकल केयर ब्लॉक को 10 दिनों के ट्रायल रन के लिए खोला गया था, लेकिन महज तीन दिन के भीतर ही उस पर ताले लटका दिए गए. अचानक हुई इस तालाबंदी ने मरीजों के साथ-साथ डॉक्टरों को भी मुश्किल में डाल दिया है.

डॉक्टरों का जरूरी मेडिकल सामान अंदर बंद

ट्रायल के दौरान पुरानी बिल्डिंग से ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड को नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक में शिफ्ट किया गया था. निर्देश मिलने पर डॉक्टरों ने न केवल अपनी सेवाएं वहां शुरू कीं, बल्कि आधुनिक मशीनें और जरूरी उपकरण भी नई इमारत में पहुंचा दिए. लेकिन तीसरे ही दिन बिना स्पष्ट सूचना के पूरी बिल्डिंग बंद कर दी गई. नतीजा यह हुआ कि डॉक्टरों का कीमती सामान अंदर कैद रह गया और मरीज इलाज के लिए बाहर भटकते रहे.

टॉर्च की रोशनी में इलाज के लिए मजबूर हैं डॉक्टर्स

लापरवाही की तस्वीरें उस वक्त सामने आईं, जब विशेषज्ञ डॉक्टरों को बिना उपकरणों के मरीजों को देखना पड़ा. कान के डॉक्टर को मरीज की जांच मोबाइल की टॉर्च जलाकर करनी पड़ी, जबकि नेत्र विशेषज्ञ बिना मशीनों के केवल अनुभव और अनुमान के आधार पर परामर्श देते नजर आए. मशीनों के अभाव में सटीक जांच संभव नहीं हो सकी, जिससे दूर-दराज से आए मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी.

अचानक क्यों लगी तालाबंदी? सवालों के घेरे में प्रबंधन

अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ट्रायल के बीच में ही आनन-फानन में बिल्डिंग को बंद करने का फैसला क्यों लिया गया. अस्पताल प्रबंधन के इस फैसले से मरीजों और डॉक्टरों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. वहीं, इलाज सिर्फ औपचारिकता तक सीमित हो गया है.

लापरवाह स्टाफ पर नोटिस की तैयारी

इस पूरे मामले पर सीएमएचओ डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि नई बिल्डिंग में अभी फायर सेफ्टी सहित कुछ तकनीकी परीक्षण बाकी हैं. ट्रायल के उद्देश्य से ओपीडी को अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया था और स्टाफ को केवल आवश्यक सामान रखने के निर्देश दिए गए थे. उन्होंने बताया कि शाम को ग्रुप मैसेज के जरिए भी सामान हटाने की सूचना दी गई थी, लेकिन संबंधित स्टाफ की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी. सीएमएचओ ने साफ कहा है कि जिम्मेदार कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जाएंगे और पूरी टेस्टिंग के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा.

यह भी पढ़ें- Illegal Mining: ग्रेनाइट की गैरकानूनी खुदाई पड़ी भारी, खनन माफिया पर लगा 8.64 करोड़ का जुर्माना

फिलहाल, जिला अस्पताल की यह अव्यवस्था मरीजों को सुविधा देने के बजाय दुविधा में डालती नजर आ रही है. क्रिटिकल केयर ब्लॉक जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का ट्रायल अगर इसी तरह चलता रहा, तो सवाल यही है कि क्या सिस्टम में सुधार होगा या मरीजों को ऐसे ही प्रयोगों का शिकार होना पड़ेगा?

यह भी पढ़ें- Singrauli Double Murder: घर पर रखी पूजा, दावत देकर बुलाया, फिर जादू-टोने की शक में दो लोगों को उतार दिया मौत के घाट

पूरी स्टोरी पढ़ें

MPCG.NDTV.in पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें. देश और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं. इसके अलावा, मनोरंजन की दुनिया हो, या क्रिकेट का खुमार,लाइफ़स्टाइल टिप्स हों,या अनोखी-अनूठी ऑफ़बीट ख़बरें,सब मिलेगा यहां-ढेरों फोटो स्टोरी और वीडियो के साथ.

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com