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Success Story: कोरोना काल की त्रासदी बनी टर्निंग पॉइंट! आगर मालवा के किसान चेन सिंह ने शुरू की पपीता खेती, आज कमा रहे लाखों

Farmer Success Story: कोरोना काल के कठिन दौर ने आगर मालवा के एक किसान चैन सिंह राठौर की जिंदगी बदल दी. आर्थिक संकट से जूझ रहे चैन सिंह ने नई राह चुनने का फैसला किया. उन्होंने ढाई बीघा खेती में पपीता की खेती की शुरुआत की. शुरुआती चुनौतियों के बावजूद मेहनत और लगन से आज वो लाखों की कमाई कर रहे हैं. उनकी ये शुरुआत आज लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है.

Success Story: कोरोना काल की त्रासदी बनी टर्निंग पॉइंट! आगर मालवा के किसान चेन सिंह ने शुरू की पपीता खेती, आज कमा रहे लाखों
Farmer Success Story: ढाई बीघा में पपीता की खेती...

Papaya Farming: मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो न सिर्फ किसानों के लिए नई दिशा दिखाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि हालात चाहे कितने ही कठिन क्यों न हों, अगर सोच बदली जाए तो किस्मत भी बदली जा सकती है. यह कहानी ग्राम आवर के किसान चैन सिंह राठौर (Farmer Success Story) की है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में हार मानने के बजाय नया रास्ता चुना और आज सफलता की नई इबारत लिख दी.

कोरोना काल में शुरू की पपीता की खेती

कोरोना महामारी के दौरान जब पारंपरिक खेती से आमदनी लगातार घटती जा रही थी, तब चैन सिंह राठौर के सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को अवसर में बदलने का निर्णय लिया. उन्होंने जोखिम उठाते हुए अपनी करीब ढाई बीघा जमीन पर पपीते की खेती शुरू की.

Papaya Farming:

Papaya Farming: पपीता की खेती से लाखों रुपये कमा रहे हैं. 

चेन सिंह ने बताया कि  शुरुआत में कई मुश्किलें आईं. नई फसल, नई तकनीक और अनिश्चित परिणाम.... लेकिन उनके हौसले और मेहनत ने धीरे-धीरे रंग दिखाना शुरू किया. आज ढाई बीघा जमीन उन्हें पहले की तुलना में तीन गुना अधिक आमदनी दे रही है. उनके खेतों में लहलहाते पपीते न केवल उनकी मेहनत की कहानी बयां करते हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि सही फसल चयन और आधुनिक सोच से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है.

पपीता की खेती में जैविक खाद कर रहे उपयोग

चैन सिंह की सफलता का एक और महत्वपूर्ण पहलू है उनकी जैविक खेती की ओर झुकाव है... चेन सिंह ने आगे बताया कि  रासायनिक खाद के बजाय गोबर खाद और प्राकृतिक तरीकों को अपनाया, जिससे उनकी लागत में कमी आई और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई. इस मॉडल ने न सिर्फ उनकी आय बढ़ाई, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी थी. 

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उनकी इस सफलता से आसपास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और पारंपरिक खेती से हटकर नई फसलों और जैविक तरीकों को अपनाने की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. चैन सिंह राठौर की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों और सोच में बदलाव हो, तो छोटी सी जमीन भी बड़ी सफलता की कहानी लिख सकती है.

ढाई बीघा से कमा रहे लाखों का मुनाफा

उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक अर्जुन सिंह राठौर ने एनडीटीवी को बताया कि जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा लगातार बढ़ाए जाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसान केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहे है. साथ उद्यानिकी फसल के सही दाम किसानों को दिलाने के लिए क्लस्टर योजना पर ध्यान दे रहे है, जिससे किसानों की लागत कम होगी और मुनाफा ज्यादा होगा.

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