Harda Farmers Protest: हरदा जिले में माचक नहर को लेकर किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है. सिंचाई के पानी की मांग को लेकर किसान पिछले चार दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई. हालात ऐसे हैं कि गुस्साए किसानों ने सूखी मूंग की फसल का प्रतीकात्मक “अंतिम संस्कार” तक कर दिया और नहर में बैठकर हनुमान चालीसा पढ़ते हुए प्रशासन की “सद्बुद्धि” के लिए प्रार्थना की. किसानों का कहना है कि अगर जल्द पानी नहीं मिला, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी.
चार दिनों से जारी है किसानों का धरना
माचक नहर के टेल क्षेत्र के किसान पिछले चार दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. सारसूद, बावड़ियां, पड़वा, तारापुर, पहेट और छीपाबड़ गांव के किसान एकजुट होकर नहर में पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.
सूखती फसल ने बढ़ाई चिंता
किसानों के मुताबिक, ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल के लिए पानी बेहद जरूरी है, लेकिन नहर में पानी नहीं आने से फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है. करीब 10 दिनों से खेतों में पानी नहीं पहुंचा, जिससे किसानों की मेहनत बर्बाद होती नजर आ रही है. यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो भारी आर्थिक नुकसान होना तय है.
सूखी नहर में किया यज्ञ और पूजा
अपनी नाराजगी जताने के लिए किसानों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया. धरना स्थल पर सूखी नहर में बैठकर यज्ञ किया गया. पंडित राघवेंद्र जोशी ने विधि-विधान से पूजा करवाई. किसानों ने सूखी मूंग की फसल को यज्ञ में आहुति के रूप में डालकर प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा व्यक्त किया और बेहतर फैसले की कामना की.
किसानों ने आरोप लगाया कि नहर के हेड क्षेत्र में रात के समय पानी की चोरी होती है, जिसके कारण टेल क्षेत्र तक पानी नहीं पहुंच पाता. उनका कहना है कि प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे निचले क्षेत्रों के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं.
किसानों की अपील- जल्द दें पानी
किसान शंकर सोलंकी ने बताया कि चार दिनों से धरना जारी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला. उन्होंने कहा कि मूंग की फसल सूख रही है और अगर जल्द पानी नहीं मिला, तो किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा. किसानों ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है.
प्रशासन ने दिया भरोसा
वहीं माचक नहर के एसडीओ रोहन विलियम ने बताया कि उनकी प्राथमिकता ऐलान क्षेत्र में पानी पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि जहां किसान पानी की मांग कर रहे हैं, वह आंशिक ऐलान क्षेत्र है. हालांकि उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जल्द ही वहां पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.