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खाद वितरण व्यवस्था ऑनलाइन होने से सीहोर के किसान नाराज, बोले- नई चीजें थोपना गलत, क्या खामियां बताईं?

मध्य प्रदेश ई-टोकन खाद वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या फार्मर आईडी की है. सीहोर में 1. 45 लाख किसानों में से सिर्फ 13,445 ने ही फार्मर आईडी बनवाई है. इसके अलावा खसरा से आधार लिंक और केवाईसी भी बड़ी समस्या है.

खाद वितरण व्यवस्था ऑनलाइन होने से सीहोर के किसान नाराज, बोले- नई चीजें थोपना गलत, क्या खामियां बताईं?

सीहोर: मध्य प्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था में बदलाव किया गया है. इसे ऑनलाइन क फार्मर आईडी के साथ जोड़ दिया गया है. किसान अब सीधे दुकानों से खाद नहीं ले सकेंगे. उन्हें ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी. लेकिन, ई-टोकन खाद वितरण व्यवस्था का जिले में किसान विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम में कई प्रकार की खामियां हैं, फार्मर आईडी की बाध्यता कर दी गई है, जबकि अधिकांश किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है.

दरअसल, अधिकांश किसान अपनी गेहूं उपज खरीदी केंद्रों व मंडियों में बेच चुके हैं,  अब वे खरीफ फसलों के लिए खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं. पहली बारिश में किसान बोनी कर देंगे. इसके बाद उन्हें खाद की जरूरत होगी. जबकि इस बार प्रदेश भर में ई-टोकन खाद वितरण प्रणाली लागू कर दी गई है. इस व्यवस्था में फार्मर आईडी की बाध्यता से किसान चिंतित हैं. उनका कहना है कि किसानों के खसरा से आधार लिंक नहीं है. खातों की केवाईसी नहीं है, पहले सरकार किसानों की आईडी बनाकर दे इसके बाद योजना लागू करे. एकदम से कोई भी नई व्यवस्था थोपना गलत है, इससे नुकसान होता है. 

1 लाख 45 हजार में से सिर्फ 13,445 किसानों के पास आईडी 

किसानों का कहना है कि ई-टोकन व्यवस्था तो लागू कर दी गई है, लेकिन जिले के अधिकांश किसानों के पास आईडी नहीं है. जिले के 1 लाख 45 हजार किसानों में से सिर्फ 13,445 किसानों ने ही फार्मर आईडी बनवाई है. किसान आईडी बनवाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं. कई किसान ऐसे हैं जो दूसरों की जमीन मुनाफा या किराए से लेकर खेती करते हैं, उनके भूमि स्वामी ने फार्मर आईडी नहीं बनवाई.

सर्वर डाउन की रहती है समस्या

इस व्यवस्था की तकनीकी खामियां भी सामने आ रही हैं, वेबसाइट में सर्वर डाउन के कारण खाद बुक नहीं हो पा रही है. किसानों का कहना है कि पर्ची जनरेट होने के बाद भी सोसायटी में खाद नहीं मिल रही. पर्ची कटाने के बाद तारीख दी जाती है, जब उस तारीख में खाद नहीं मिलती है तो पर्ची का समय समाप्त हो जाता है.

फार्मर आईडी के लिए शिविर लगाए जा रहे 

डीडीए अशोक उपाध्याय का कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम से खाद की कालाबाजारी पर रोक लगेगी, किसान घर बैठकर खाद बुक कर सकते हैं, उन्हें लाइन में नहीं लगना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि किसानों के लिए गांव-गांव फार्मर आईडी बनाने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं,  जहां वे अपना पंजीयन करवा सकते हैं.

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