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Dhar Bhojshala: सर्वे, सुनवाई व फैसले से पहले ही भोजशाला में जश्न, भजन पर नृत्य करती महिला का वीडियो हुआ वायरल

HC on Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के एक दिन बाद मंगलवार को धार स्थित भोजशाला में हिंदू समुदाय के कई सदस्यों ने जमकर जश्न मनाया और वहां हनुमान चालीसा का पाठ किया.

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Dhar Bhojshala: सर्वे, सुनवाई व फैसले से पहले ही भोजशाला में जश्न, भजन पर नृत्य करती महिला का वीडियो हुआ वायरल

Dhar Bhojshala Dispute: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार (Dhar)  में मध्यकालीन युग की ऐतिहासिक भोजशाला (Bhojshala) को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) के फैसले के एक दिन बाद मंगलवार को कई हिंदू समुदाय के सदस्यों ने इसके परिसर में जमकर जश्न मनाया और वहां हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ किया. इस बीच एक वीडियो सोशल मीडिया (Socail Media) पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें भोजशाला परिसर में महिलाएं भजन पर नृत्य करती नजर आ रही हैं. हालांकि, अभी सर्वे का काम और उसके आधार पर फैसला आना अभी बाकी है. वहीं, मुस्लिम (MUslim) समुदाय के सदस्य उच्च न्यायालय (Supreme Court) के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने की तैयारी कर रहे हैं.

अभी है ऐसी व्यवस्था

दरअसल, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को छह सप्ताह के भीतर भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया था. गौरतलब है कि भोजशाला परिसर पर हिंदू और मुस्लिम दोनों अपना दावा करते हैं. एएसआई द्वारा संरक्षित 11वीं सदी के स्मारक भोजशाला को हिंदू वाग्देवी (देवी सरस्वती) को समर्पित एक मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है. सात अप्रैल 2003 को एएसआई द्वारा की गई एक व्यवस्था के अनुसार हिंदू मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करते हैं, जबकि मुस्लिम शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करते हैं.

 भोजशाला हिंदुओं को मिलने की कामना

भोज उत्सव समिति के नेता अशोक जैन ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मंगलवार को लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और भगवान से प्रार्थना की कि यह सर्वेक्षण जल्द पूरा हो और भोजशाला हिंदुओं को दी जाए.
भोज उत्सव समिति के महासचिव सुमित चौधरी ने कहा कि एएसआई सर्वेक्षण की लंबे समय से की जा रही मांग को उच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है. उन्होंने आगे कहा कि अब जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी और भोजशाला अपना गौरव फिर से हासिल कर लेगी. हिंदू समुदाय के एक अन्य नेता गोपाल शर्मा का कहना है कि लोगों ने अदालत के फैसले पर खुशी व्यक्त की और इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया. उन्होंने कहा कि यहां पिछले 32 वर्षों से लगातार हर मंगलवार को सत्याग्रह किया जाता रहा है. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के कारण भोजशाला मुद्दे की देशभर में चर्चा हो रही है.

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मुसलमानों ने फैसले को नकारा, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे

वहीं, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर धार के शहर काजी वकार सादिक ने सोमवार को कहा कि उच्च न्यायालय का फैसला मुस्लिम समुदाय को स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा था कि पूरे सम्मान के साथ हम कहना चाहते हैं कि उच्च न्यायालय का आदेश मुस्लिम समुदाय को स्वीकार्य नहीं है. हमारी समिति जल्द ही इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करेगी.

ऐसा समझा जाता है कि एक हिंदू सम्राट राजा भोज ने 1034 ई. में भोजशाला में वाग्देवी की मूर्ति स्थापित की थी. हिंदू समूहों का कहना है कि अंग्रेज इस मूर्ति को 1875 में लंदन ले गए थे.

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