बैतूल जिले की जनपद पंचायत में आदिवासी छात्रावासों के बिजली बिल भुगतान से जुड़ा घोटाला सामने आया है. मामले में थाना कोतवाली पुलिस ने जनपद पंचायत बैतूल से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर छात्रावासों के विद्युत देयकों के भुगतान में वित्तीय अनियमितता और शासकीय राशि के गबन का केस दर्ज किया गया है. जांच में सामने आया है कि जनजातीय कार्य विभाग के छात्रावासों के बिजली बिलों का भुगतान जनपद पंचायत बैतूल के डीडीओ कोड से किया जाता था.
दरअसल, यह मामला दो महीने पहले तब सामने आया था जब जनपद पंचायत बैतूल की सीईओ शिवानी राय ने छात्रावासों के बिजली बिलों के भुगतान रिकॉर्ड की नियमित जांच कराई. इस दौरान यह सामने आया कि मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी MPEB के नाम से जारी बिलों का भुगतान जिन खातों में दिखाया गया है, वे वास्तविक MPEB खातों से मेल नहीं खाते. इसकी जानकारी जिला पंचायत बैतूल के सीईओ अक्षत जैन को दी. इसके बाद जिला पंचायत स्तर पर जनपद सीईओ और ट्रेजरी ऑफिसर से विस्तृत जांच कराई गई. जांच में यह खुलासा हुआ कि पिछले करीब दो वर्षों से आदिवासी छात्रावासों के बिजली बिलों की राशि भुगतान के समय खाते का नंबर बदलकर चार अलग अलग निजी व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर की जा रही थी. इस तरह लगभग 40 लाख रुपए की शासकीय राशि का गबन किया गया.
कंप्यूटर ऑपरेटर समेत दो आरोपी
प्राथमिक जांच में जनपद पंचायत के कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा खाते के नंबर में बदलाव करने की बात स्वीकार की थी. इस पूरे मामले में जनजातीय कार्य विभाग के कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी गई थी. अब जनपद पंचायत के जांच प्रतिवेदन के आधार पर थाना कोतवाली बैतूल पुलिस ने वित्तीय अनियमितता और शासकीय राशि के गबन का केस दर्ज किया है. मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर समेत दो को आरोपी बनाया गया हैॅ. पुलिस मामले की जांच कर रही है.