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This Article is From Feb 25, 2026

नक्सली देवजी ने सेहत के कारण डाले हथियार! 44 साल अंडरग्राउंड रहने के बाद ऐसे किया सरेंडर 

तेलंगाना में माओवादी गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है. 44 साल से अंडरग्राउंड कुख्यात नक्सली देवजी ने खराब सेहत और लगातार बातचीत के बाद पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. SIB की महीनों की रणनीति, बैक‑चैनल संपर्क और रिहैबिलिटेशन पॉलिसी ने इसमें अहम भूमिका निभाई.

नक्सली देवजी ने सेहत के कारण डाले हथियार! 44 साल अंडरग्राउंड रहने के बाद ऐसे किया सरेंडर 

Maoist Devji Surrender Story: तेलंगाना में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. 44 साल तक अंडरग्राउंड रहे कुख्यात नक्सली देवजी समेत CPI (माओवादी) के चार सीनियर कमांडरों ने तेलंगाना डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी के सामने सरेंडर कर दिया. खराब सेहत, उम्र और लगातार बातचीत ने उन्हें हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आने के लिए तैयार किया. यह कदम राज्य में माओवादी नेटवर्क के कमजोर होने का बड़ा संकेत माना जा रहा है.

तेलंगाना पुलिस ने बताया कि सरेंडर करने वालों में पोलित ब्यूरो मेंबर टिपिरी तिरुपति उर्फ देवजी भी शामिल है, जो 44 साल से जंगलों में अंडरग्राउंड था और जिस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस का कहना है कि यह विकास माओवादी संगठन की सेंट्रल और स्टेट यूनिट के लिए बड़ा झटका है.

SIB की महीनों की कोशिशों से बना भरोसा

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह सरेंडर अचानक नहीं हुआ. SIB की स्पेशल टीम लंबे समय से चुपचाप बातचीत कर रही थी. IG बी. सुमति की लीडरशिप में टीम ने माओवादी नेताओं के साथ बैक‑चैनल कम्युनिकेशन बनाया. शुरू में नेताओं को अपनी सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया को लेकर डर था, लेकिन पुलिस ने धैर्य से उनके हर संदेह को दूर किया.

सेहत बिगड़ने ने बदला देवजी का फैसला

अधिकारियों ने बताया कि उम्र बढ़ने और लगातार बिगड़ती सेहत ने देवजी के फैसले में अहम भूमिका निभाई. SIB ने उन्हें यह भरोसा दिया कि सरेंडर के बाद बेहतर इलाज, सुरक्षा और सामान्य जीवन जीने का मौका मिलेगा. यही कारण रहा कि देवजी मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हुआ. सरेंडर के बाद उसने कहा कि “मैंने हेल्थ प्रॉब्लम की वजह से हथियार छोड़े हैं. अब मैं संविधान के दायरे में रहकर लोगों के लिए काम करूंगा.”

सरकारी रिहैबिलिटेशन पॉलिसी बनी बड़ा कारण

तेलंगाना सरकार की सरेंडर और रिहैबिलिटेशन पॉलिसी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस पॉलिसी के तहत हिंसा छोड़ने वालों को वित्तीय सहायता, घर, नौकरी के लिए प्रशिक्षण और जरूरी मदद दी जाती है. इतना ही नहीं, उनके ऊपर घोषित इनाम की राशि भी उन्हें ही दी जाती है ताकि वे नई शुरुआत कर सकें.

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SIB चीफ सुमति का लो‑प्रोफाइल लेकिन मजबूत काम

SIB की IG बी. सुमति इस ऑपरेशन की सबसे मजबूत कड़ी रहीं. उन्होंने ग्राउंड इंटेलिजेंस बढ़ाया, भरोसेमंद सूचनाओं का नेटवर्क बनाया और माओवादियों तक पहुंचकर उन्हें शांतिपूर्ण रास्ता चुनने के लिए प्रेरित किया. कानून‑व्यवस्था और एंटी‑एक्सट्रीमिस्ट ऑपरेशन में लंबे अनुभव ने उन्हें इस मिशन को सफल बनाने में मदद की.

शांति की ओर मजबूत कदम

अधिकारियों का कहना है कि बातचीत, भरोसा, रिहैबिलिटेशन और सुरक्षा इन सभी प्रयासों ने मिलकर इस ऑपरेशन को सफल बनाया. इसे तेलंगाना में स्थायी शांति की दिशा का एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

आशीष कुमार पांडेय की रिपोर्ट...

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