Sanjay Leela Bhansali Latest: एक ऐसे उद्योग में जहां भव्यता और विशाल पैमाना अक्सर सफलता को परिभाषित करते हैं, वहां कुछ ही फिल्मकार हैं जिन्होंने दृश्यात्मक कहानी कहने की कला में संजय लीला भंसाली (Sanjay Leela Bhansali) जैसी महारत हासिल की है. जब सिनेमाई वैभव की बात आती है, तो करण जौहर (Karan Johar) भी उनकी प्रशंसा करने से खुद को रोक नहीं पाते.
कॉस्ट्यूम्स के कारण
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि आखिरी बार उन्होंने क्या देखा जिसने उन्हें कॉस्ट्यूम्स के कारण नाइस कहने पर मजबूर कर दिया, तो करण जौहर ने बिना झिझक मशहूर फिल्मकार संजय लीला भंसाली की तारीफों के पुल बांध दिए. उन्होंने कहा कि हमेशा वही जो भंसाली करते हैं. उनकी हर फिल्म में कॉस्ट्यूम्स बस शानदार होते हैं. मैं उन्हें उन फिल्मकारों में से एक मानता हूं. जिन्हें मैं भारतीय सिनेमा की सबसे सौंदर्यपूर्ण आवाज़ों में गिनता हूंय इसलिए कहूंगा कि भंसाली की हर फिल्म. जौहर के शब्द वही भावना दोहराते हैं जिसे दर्शक और समीक्षक लंबे समय से साझा करते आए हैं. देवदास के भव्य सेट्स से लेकर पद्मावत की शाही भव्यता तक, और बाजीराव मस्तानी तथा गंगूबाई काठियावाड़ी की बारीकियों तक, भंसाली की फिल्में दृश्यात्मक कविता का पर्याय बन चुकी हैं. उनके कॉस्ट्यूम्स केवल परिधान नहीं होते, बल्कि वे किरदार, भाव और कहानी का विस्तार होते हैं. भंसाली की फिल्मों का हर फ्रेम मानो किसी जीवंत चित्रकला की तरह बारीकी से गढ़ा गया हो.
गुरु दत्त और राज कपूर
इसी विशिष्ट दृश्य भाषा के कारण भंसाली की तुलना अक्सर गुरु दत्त और राज कपूर जैसे दिग्गज फिल्मकारों से की जाती है. ऐसे ऑट्योर जिन्होंने भारतीय सिनेमा में भावनात्मक गहराई और काव्यात्मकता जोड़ी. उनकी तरह, भंसाली भी मजबूत कहानी कहने की कला को अपनी व्यक्तिगत कलात्मक छाप के साथ जोड़ते हैं, जिससे उनकी फिल्में भव्य होने के साथ-साथ कालातीत भी लगती हैं.
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