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अनुराग कश्यप ने ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह के अभिनय को लेकर क्या कहा, जानें

Anurag Kashyap On Dhurandhar : इस परफॉर्मेंस की सबसे खास बात है इसकी सच्चाई और मजबूती, रणवीर किसी सीन को निभाते नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह जीते हैं. उनकी हर नजर, हर ठहराव और भावनाओं की  तीव्रता बहुत सोच-समझकर की गई लगती है.

अनुराग कश्यप ने ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह के अभिनय को लेकर क्या कहा, जानें
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Anurag Kashyap On Dhurandhar : अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) का यह बयान वही भावना है जो फिल्म प्रेमियों के बीच लगातार सुनने को मिल रही है. दर्शक और समीक्षक दोनों ही धुरंधर (Dhurandhar) में रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की परफॉर्मेंस की जमकर तारीफ कर रहे हैं. अपने करियर में कई बेहतरीन और अलग-अलग किरदार निभा चुके रणवीर ने इस फिल्म में एक और शानदार प्रदर्शन दिया है, जिसे कई लोग उनका अब तक का सबसे संतुलित, आत्मविश्वासी और बेहतरीन अभिनय मान रहे हैं.

रणवीर किसी सीन को निभाते नहीं

इस परफॉर्मेंस की सबसे खास बात है इसकी सच्चाई और मजबूती, रणवीर किसी सीन को निभाते नहीं, बल्कि उसे पूरी तरह जीते हैं. उनकी हर नजर, हर ठहराव और भावनाओं की  तीव्रता बहुत सोच-समझकर की गई लगती है. उनके अभिनय में एक खास तरह की शांति है, जो तभी आती है जब अभिनेता अपने हुनर को लेकर पूरी तरह निश्चिंत होता है. यही आत्मविश्वास अनुभवी फिल्ममेकर्स से लेकर पहली बार फिल्म देखने वालों तक, सभी को प्रभावित कर रहा है. फिल्म और रणवीर की परफॉर्मेंस की तारीफ करते हुए अनुराग कश्यप ने लिखा कि कोई जासूस तब तक जासूस नहीं हो सकता जब तक उसके अंदर दुश्मन देश के खिलाफ गुस्सा और नफरत न हो. एक सैनिक भी तब तक सैनिक नहीं हो सकता जब तक उसमें दुश्मन देश के लिए आक्रोश न हो. इन दोनों बातों पर मुझे कोई समस्या नहीं है. लेकिन दो सीन ऐसे हैं जिनसे मुझे दिक्कत है. एक जब माधवन कहते हैं कि एक दिन ऐसा आएगा जब जो देश के बारे में कोई सोचेगा और दूसरा आखिर में जब रणवीर कहते हैं कि ये नया इंडिया है. इन दो डायलॉग्स को छोड़ दें तो यह एक अच्छी फिल्म है.

पूरी तरह पाकिस्तान में सेट

उन्होंने आगे लिखा कि यह एक शानदार फिल्म है, जो पूरी तरह पाकिस्तान में सेट है. मैं आदित्य धर को उनकी नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म ‘बूंद' के समय से जानता हूं. यह उनकी राजनीति है, सच्ची राजनीति. आप इससे सहमत हों या असहमत, लेकिन वह ईमानदार इंसान हैं, दूसरों की तरह मौके का फायदा उठाने वाले नहीं. उनकी लगभग सभी फिल्में कश्मीर पर आधारित हैं. वह एक कश्मीरी पंडित हैं और उन्होंने बहुत कुछ सहा है. आप उनसे बहस कर सकते हैं या उन्हें उनके हाल पर छोड़ सकते हैं. फिल्ममेकिंग बेहद शानदार है. अगर आपको ‘द हर्ट लॉकर', ‘जीरो डार्क थर्टी' या ‘हाउस ऑफ डायनामाइट' पसंद है, तो यह फिल्म भी पसंद आएगी. ये सभी अमेरिका पर बनी ऑस्कर जीतने वाली प्रोपेगेंडा फिल्में हैं. मैंने उन दो प्रोपेगेंडा डायलॉग्स को नजरअंदाज किया और फिल्ममेकिंग और निर्देशक की जिद को पसंद किया और रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस मेरी फेवरेट है बहुत सिक्योर. अगर मुझे इसकी राजनीति पर बहस करनी हो, तो मैं आदित्य धर को फोन करूंगा. लेकिन यह एक अहम फिल्म है.

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