
Gariaband : छत्तीसगढ़ के कोपरा नगर पंचायत में शराब दुकान खोलने को लेकर अजीब स्थिति बन गई है. अब इस फैसले की बागडोर नगर पंचायत के हाथ से निकलकर सीधे वार्डवासियों के पास आ गई है. यानी, पहली बार ऐसा हो रहा है जब जनता को खुद तय करना होगा कि उनके इलाके में शराब की दुकान खुलेगी या नहीं. आमतौर पर विकास योजनाओं, सड़कों और सफाई व्यवस्था को लेकर जनता की राय मांगी जाती है, लेकिन कोपरा में "शराब दुकान खोलनी है या नहीं". यह तय करने के लिए वार्ड स्तर पर रायशुमारी होगी. नगर पंचायत ने इस विवाद को हल करने के लिए जनता की तरफ गेंद फेंक दी है. अब नगरवासी ही तय करेंगे कि "पीने की आजादी" मिलेगी या नहीं.
शराब दुकान समर्थक Vs विरोधी
नगर में दो गुट साफ बन चुके हैं. समर्थकों का कहना है कि शराब दुकान से राजस्व मिलेगा, व्यापार बढ़ेगा और स्थानीय लोगों को सुविधा होगी. दूसरी ओर, विरोध करने वालों का कहना है कि इससे सामाजिक बुराइयां बढ़ेगी, अपराध और घरेलू हिंसा के मामले बढ़ सकते हैं.
नगर पंचायत का "सर्वे मॉडल"
नगर पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि हर वार्ड में लोगों से उनकी राय ली जाएगी और बहुमत के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. यानी, कोपरा में अब चुनाव सिर्फ नेता चुनने के लिए नहीं, बल्कि "शराब दुकान खोलने या नहीं खोलने" के लिए भी होने जा रहा है.
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अब क्या होगा?
यह देखना दिलचस्प होगा कि वार्डवासी विकास को शराब से जोड़कर देखते हैं या सामाजिक नुकसान को ज्यादा अहमियत देते हैं. नगर पंचायत का यह अनोखा प्रयोग पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया. अब कोपरा में असली घमासान इस बात पर होगा कि "शराब दुकान खुलेगी या वार्डवासी इसे ठुकरा देंगे.