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अटका महापर्व क्‍या है? भक्त जीतेंद्र को सात साल इंतजार के बाद मिला प्रसाद अर्पण का अवसर, क्‍यों लगे इतने साल

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र स्थित श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर मुकुंदपुर में मनाया जाने वाला अटका महापर्व आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक है. होली के दूसरे दिन भगवान जगन्नाथ को विशेष अटका महाप्रसाद अर्पित किया जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु कढ़ी-भात का प्रसाद ग्रहण करते हैं. सात साल के इंतजार के बाद भक्त जीतेंद्र सिंह को इस वर्ष महाप्रसाद अर्पित करने का अवसर मिला.

अटका महापर्व क्‍या है? भक्त जीतेंद्र को सात साल इंतजार के बाद मिला प्रसाद अर्पण का अवसर, क्‍यों लगे इतने साल

Jagannath Swami Temple Mukundpur Maihar Madhya Pradesh: मध्‍य प्रदेश के मैहर जिले के अमरपाटन स्थित विंध्य अंचल की आस्था और सामाजिक समरसता का अनूठा संगम श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर मुकुंदपुर है,  जहां होली का पर्व केवल रंगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि “अटका महापर्व” के रूप में आध्यात्मिक उल्लास में बदल जाता है. हर वर्ष होली के दूसरे दिन यहां भगवान जगन्नाथ को विशेष अटका महाप्रसाद अर्पित किया जाता है और लाखों श्रद्धालु कढ़ी-भात के प्रसाद को ग्रहण करने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं. विंध्य क्षेत्र में स्थित यह धाम होली के अवसर पर आस्था का विशाल केंद्र बन जाता है. रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली और पन्ना सहित देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त यहां उमड़ते हैं. यहां प्रचलित कहावत 'जगन्नाथ के भात को जगत पसारे हाथ' फगुआ के दिन चरितार्थ होती दिखाई देती है, जब हजारों लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं. 

Jagannath Swami Temple Mukundpur Maihar Madhya Pradesh

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अटका प्रसाद का विशेष महत्व माना जाता है. पौराणिक मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन और उनके महाप्रसाद के सेवन से व्यक्ति पापों से मुक्त होता है. सदियों से यह प्रसाद जाति-पंथ के भेदभाव को मिटाने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का प्रतीक रहा है. कढ़ी-भात का यह भंडारा भाईचारे और एकता का संदेश देता है. यहां न केवल प्रसाद पाने के लिए कतार लगती है बल्कि अर्पण के लिए भी अपनी बारी का इंतजार कई साल करना पड़ता है. मैहर जिले के अमरपाटन तहसील के कसतरा जमुना निवासी जीतेंद्र सिंह को सात साल इंतजार के बाद यह विशेष अवसर मिला. 

Jagannath Swami Temple Mukundpur Maihar Madhya Pradesh

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मंदिर का इतिहास क्या है?

मंदिर का इतिहास भी अत्यंत गौरवशाली है. बताया जाता है कि रीवा राज्य के महाराजा भाव सिंह जू देव ने सन् 1680-81 के बीच इस मंदिर का निर्माण कराया था. वे जगन्नाथपुरी से भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की प्रतिमाएं लेकर आए थे और उन्हें यहां स्थापित किया. मान्यता है कि पहली अटका भी स्वयं महाराजा ने ही चढ़ाई थी. मंदिर में कल्चुरी कालीन भगवान विष्णु की एक उत्कृष्ट मूर्ति भी स्थापित है, जो यहां की प्राचीनता और कला वैभव को दर्शाती है. 

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मंदिर अध्यक्ष मिजाजी लाल तिवारी ने बताया क‍ि विशेष बात यह है कि अटका महाप्रसाद चढ़ाने का अवसर हर वर्ष किसी नए भक्त को दिया जाता है. आयोजनकर्ता को मंदिर की सजावट, मरम्मत और लाखों श्रद्धालुओं के लिए कढ़ी-भात के भंडारे की व्यवस्था करनी होती है. आस्था का आलम यह है कि वर्ष 2035 तक अटका की बुकिंग पूरी हो चुकी है.

होली के इस विशेष आयोजन में एक और अनोखी परंपरा है, भगवान जगन्नाथ को भी इस महाभोग के लिए सालभर इंतजार करना पड़ता है, क्योंकि यह महाप्रसाद वर्ष में केवल एक बार ही अर्पित किया जाता है. यही कारण है कि मुकुंदपुर की होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि श्रद्धा, परंपरा और सामाजिक एकता का विराट उत्सव बन जाती है. 

Jagannath Swami Temple Mukundpur Maihar Madhya Pradesh

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मंदिर में प्रसाद चढ़ाने का यह है नियम?

श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर मुकुंदपुर में अटका महाप्रसाद चढ़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है. इसके लिए इच्छुक भक्तों को मंदिर में विधिवत आवेदन देना होता है. आवेदन के साथ 5000 रुपये शुल्क जमा किया जाता है. इसके बाद मंदिर समिति रजिस्टर में दर्ज क्रम संख्या के अनुसार तय करती है कि संबंधित भक्त का नंबर किस वर्ष आएगा.

मंदिर में हर वर्ष के लिए केवल एक ही स्लॉट निर्धारित किया जाता है. वर्तमान में अटका महाप्रसाद अर्पण की बुकिंग वर्ष 2035 तक पूरी हो चुकी है. यदि अब कोई नया आवेदन देता है तो उसका नंबर वर्ष 2036 में आएगा. होली के फगुआ के दिन निर्धारित परंपरा के अलावा किसी अन्य तिथि पर अटका महाप्रसाद चढ़ाना संभव नहीं है. 

Jagannath Swami Temple Mukundpur Maihar Madhya Pradesh

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मंदिर अध्यक्ष मिजाजी लाल तिवारी ने बताया कि यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है. रीवा रियासत के महाराजा भाव सिंह जू देव जगन्नाथपुरी से भगवान जगन्नाथ की मूर्ति लाकर यहां स्थापित किए थे. तभी से यहां अटका महाप्रसाद चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है.

उन्होंने बताया कि जो भी श्रद्धालु अटका महाप्रसाद अर्पित करना चाहते हैं, वे 5000 रुपये जमा कर आवेदन करते हैं. इसके बाद समिति क्रम अनुसार वर्ष निर्धारित करती है. वर्तमान में वर्ष 2035 तक की सभी तिथियां बुक हैं और अब प्राप्त होने वाले आवेदन वर्ष 2036 के लिए दर्ज किए जा रहे हैं.

मंदिर समिति के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की कृपा से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, इसलिए अटका महाप्रसाद अर्पण के लिए वर्षों तक प्रतीक्षा करना भी भक्तों के लिए आस्था का विषय बना रहता है.

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