Chhattisgarh Liquor Scam Latest Update: छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री, आदिवासी नेता और कोंटा (Konta) विधायक कवासी लखमा (Kawasi Lakhma) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के चर्चित शराब घोटाला (Liquor Scam) मामले में कवासी लखमा को भाजपा सरकार के उपमुख्यमंत्री ही निर्दोष बता रहे हैं. ऐसे में इस पर कांग्रेस ने पलटवार शुरू कर दिया है.
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को जमानत मिली, तो इसे जीत के जश्न की तरह सेलिब्रेट किया गया, लेकिन इसी मामले में आदिवासी नेता और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा अब भी जमानत के इंतजार में जेल में बंद हैं. शराब घोटाला में कांग्रेस नेताओं पर कार्रवाई के बीच उपमुख्यमंत्री के एक बयान ने सियासी वार शुरू कर दिया है.

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साव ने लखमा को बताया निर्दोष
दरअसल, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने बयान में भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए कहा कि बेटे की जमानत को जश्न की तरह मनाया गया, जबकि एक निर्दोष आदिवासी नेता को इस मामले में फंसा दिया गया है. इसके आगे उन्होंने कहा, जिस तरह से एक निर्दोष आदिवासी को लोगों ने उनके साथ अन्याय कर फंसाया है, उसे प्रदेश की जनता ने देखा है.

कांग्रेस ने जांच एजेंसी पर किया प्रहार
उपमुख्यमंत्री अरुण साव के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है. शराब घोटाला मामले में चल रही जांच के बीच कवासी लखमा को लेकर दिए गए उपमुख्यमंत्री के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार कर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. साव के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रहार करते कहा कि कवासी लखमा अगर निर्दोष हैं, तो उन्हें जेल में क्यों बंद कर कर रखा है. केंद्र की जांच एजेंसी और राज्य की जांच एजेंसी eow उनके खिलाफ आरोप प्रस्तुत किए हैं. हम लोग तो पहले से ही कह रहे हैं कि इस मामले में गलत तरीके से विपक्ष के नेताओं को फंसाया गया है. एजेंसी टारगेट करके कार्रवाई कर रही है. न्यायिक प्रक्रिया चल रही है. हमें उम्मीद है कि कवासी लखमा को भी जल्द ही न्यायालय से न्याय मिलेगा.
जांच एजेंसियों ने लगाए हैं ये आरोप
जांच एजेंसियों का आरोप है कि दिसंबर 2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सिंडिकेट बनाकर शराब घोटाले को अंजाम दिया गया. इस दौरान तीन साल के भीतर ही 2800 करोड़ रुपये से ज्यादा का शराब घोटाले तो अंजाम दिया गया. एजेंसियों के मुताबिक घोटाले की रकम में 1500 करोड़ रुपए कांग्रेस पार्टी फंड में दिया गया. वहीं, घोटाले की रकम में से 115 करोड़ रुपये सौम्या चौरसिया को मिले. सौम्या चौरसिया तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव थीं. इसके अलावा, 90 करोड़ अनवर ढेबर, 72 करोड़ कवासी लखमा, 55 करोड़ अरुण पति त्रिपाठी, 18 करोड़ निरंजन दास, 14 करोड़ अनिल टुटेजा को दिए गए. इसके साथ ही सिंडिकेट में शामिल अन्य अधिकारी, कर्मचारी, व्यवसायी और नेताओं ने भी करोड़ों रुपये की कमाई की.
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तीन पार्ट में घोटाले को अंजाम दिया गया
पार्ट-1- 319 करोड़ रुपये डिस्टलरी मालिकों से प्रति पेटी कमीशन वसूला गया.
पार्ट-2- 2174 करोड़ रुपये सरकारी दुकानों के जरिए अवैध शराब की बिक्री कराकर कमाए गए.
पार्ट-3 FL- 10 लाइसेंस प्रक्रिया कर 270 करोड़ पैसे ज्यादा कमाए गए.
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