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This Article is From Sep 14, 2023

"सरकारी महकमे में काम करना आसान नहीं, बाल अपराध की घटनाएं करती हैं विचलित" - इंदौर पुलिस कमिश्नर

NDTV से बात करते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर मकरंद देऊस्कर ने कहा कि चाहे कितना भी बड़ा चैलेंज क्यों ना हो, लेकिन जब सभी लोग मिलजुल कर किसी भी समस्या पर काम करते हैं तो वह टीमवर्क होता है, और टीमवर्क में किए गए काम में निश्चिततौर पर सफलता मिलती है.

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"सरकारी महकमे में काम करना आसान नहीं, बाल अपराध की घटनाएं करती हैं विचलित" - इंदौर पुलिस कमिश्नर
IPS मकरंद देऊस्कर वर्तमान में मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर के पुलिस कमिश्नर हैं.
इंदौर:

1997 बैच के IPS मकरंद देऊस्कर वर्तमान में मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर के पुलिस कमिश्नर हैं. IPS मकरंद देऊस्कर का कहना है, वर्तमान समय में बाल अपराध, रेप और हत्या जैसे अपराध बढ़ते जा रहे हैं. वैसे तो उन्हें हर अपराध पर चिंता होती है लेकिन बच्चों से जुड़े अपराध व घटनाएं उन्हें विचलित कर देती हैं. उन्होंने कहा कि इन अपराधों को रोकना एक बड़ा चैलेंज है. इसके साथ ही उनका मानना है कि जनता से जुड़े किसी भी सरकारी विभाग में काम करना हर पल एक नया चैलेंज लेकर आता है, वैसा ही चेलेंज पुलिस के सामने भी हर समय बना रहता है.

टीमवर्क से मिलती है सफलता

NDTV से बात करते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर मकरंद देऊस्कर ने कहा कि चाहे कितना भी बड़ा चैलेंज क्यों ना हो, लेकिन जब सभी लोग मिलजुल कर किसी भी समस्या पर काम करते हैं तो वह टीमवर्क होता है, और टीमवर्क में किए गए काम में निश्चिततौर पर सफलता मिलती है. उन्होंने एक वाक्या शेयर करते हुए बताया कि जब वे साल 2007 में जबलपुर के पुलिस अधीक्षक थे, तब जबलपुर में दंगे हो गए थे. कुछ क्षेत्रों में उन्हें सख्ती करते हुए कर्फ्यू लगाना पड़ा. इस दौरान वे काफी परेशान हो गए थे. उनका मानना था कि जहां भी दंगे होते हैं वहां जान-माल का बड़ा नुकसान होता है और वहां के पुलिस अधिकारी का ट्रांसफर होना भी तय है, लेकिन उन्होंने किसी भी बात की परवाह किए बगैर शहर में दंगे शांत कराए और आपसी सौहार्द पर काम किया. पूरी टीम की मेहनत (टीमवर्क) का नतीजा यह रहा कि शहर में सब कुछ सही रहा.

यह भी पढ़ें: इंदौर में बदमाशों के हौसले बुलंद, गांजा पीने वालों ने पुलिस पर की फायरिंग 

 IPS मकरंद देऊस्कर कहते हैं कि किसी भी समस्या पर मिलजुल कर काम करने (टीमवर्क) से सफलता जरूर मिलती है.

IPS मकरंद देऊस्कर कहते हैं कि किसी भी समस्या पर मिलजुल कर काम करने (टीमवर्क) से सफलता जरूर मिलती है.

प्रदेश में कई बड़ें पदों का कार्यभार संभाल चुके हैं IPS मकरंद देऊस्कर

22 मार्च 2023 को इंदौर के दूसरे पुलिस कमिश्नर का पदभार संभालने वाले IPS मकरंद देऊस्कर भोपाल के पुलिस कमिश्नर भी रह चुके हैं. जब भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नरी लागू की गई तो उन्हें भोपाल का कमिश्नर बनाया गया था. इससे पहले वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के OSD थे. 1997 बैच के IPS मकरंद देऊस्कर जबलपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और होशंगाबाद जैसे बड़े शहरों में पुलिस अधीक्षक के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इसके साथ ही वे आईजी इंटेलिजेंस और आईजी लॉ एंड ऑर्डर भी रह चुके हैं. IPS मकरंद देऊस्कर की पहली पोस्टिंग बड़वानी जिले में हुई थी.

इंदौर शहर को अपराध और नशा मुक्त करना चाहते हैं पुलिस कमिश्नर

इंदौर में पुलिस कमिश्नर के रूप में चार्ज लेने के बाद IPS मकरंद देऊस्कर की प्राथमिकता इंदौर शहर के ट्रैफिक को सुचारू करना है. इसके अलावा महिला अपराधों पर नियंत्रण करना, साइबर अपराधों को रोकना, गुंडों पर सख्ती करना, फ्रॉड के बढ़ते मामलों को रोकना और जनता को त्वरित न्याय देने के लिए पुलिस का तेजी से काम करना, जैसे चैलेंजेस पर काम करना उनकी प्राथमिकताएं हैं. इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर का मुख्य रूप से फोकस तेजी से नशे की ओर बढ़ रहे इंदौर शहर को नशा मुक्त करना है. 

2016 का सिंहस्थ सबसे बड़ा चैलेंज

इंदौर पुलिस कमिश्नर मकरंद देऊस्कर ने बताया कि ड्यूटी के दौरान कई चैलेंजेस आते हैं. उन्हें भी कई चैलेंजेस ने निपटना पड़ा है. उन्होंने बताया कि जब वे होशंगाबाद के पुलिस अधीक्षक बनाए गए. वहां उन्होंने एक आदतन अपराधी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की. उस अपराधी ने अपराध के माध्यम से जितनी भी संपत्ति अर्जित की थी, उसे धारा 105 (C) के तहत जब्त कर ली. साथ ही जब वे छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक थे तब वहां लूट की एक गैंग हुआ करती थी, जो हत्या कर लूट की वारदात को अंजाम देते थी. उस गैंग ने 30 से ज्यादा डकैती की वारदात को अंजाम दिया था.

IPS मकरंद देऊस्कर ने बताया कि इस गैंग को पकड़ना बड़ा चैलेंज था, लेकिन गैंग को पकड़ कर इस गिरोह का पर्दाफाश किया गया. उन्होंने बताया कि साल 2016 में आईजी (लॉ एंड ऑर्डर) होते हुए उनके सामने सबसे बड़ा चैलेंज उज्जैन सिंहस्थ था. इस दौरान जब बारिश हुई, जिसके कारण हर तरफ अफरा-तफरी मची. इस चैलेंज को भी पूरी टीम ने तत्परता से स्वीकारा और किसी भी मुसीबत से निपटने के लिए पुलिस ने प्रशासन से तालमेल बिठाकर काम किया और सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन सिहस्थ शांतिपूर्ण संपन्न हो सका.

पुलिस की नौकरी में आप परिवार के साथ होकर भी साथ नहीं होते

छत्तीसगढ़ के भिलाई में 27 नवंबर 1972 को जन्में IPS मकरंद देऊस्कर की ज्यादातर पढ़ाई भोपाल में हुई है. हालांकि उनकी प्रारंभिक पढ़ाई धार और होशंगाबाद में हुई थी. परिवार में माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी और दो बेटियां हैं. उनका परिवार ज्यादातर समय उनके साथ ही रहता है, फिर भी वे अपने परिवार को उतना समय नहीं दे पाते. उनका कहना है कि पुलिस की नौकरी में आप परिवार के साथ होकर भी उनके साथ नहीं होते हो. आप अगर परिवार के साथ कहीं घूमने जा रहे हैं फिर भी आपको ड्यूटी से संबंधित काम के लिए मोबाइल पर बने ही रहना पड़ता है. परिवार को छोड़कर अपने काम की तरफ ध्यान देना पड़ता है. कहीं चक्का जाम हो गया तो उसका अपडेट कहीं और कोई बड़ा अपराध हो गया तो उसका अपडेट लेना पड़ता है. परिवार भी इस बात का आदी हो गया है.

करोक

IPS मकरंद देऊस्कर की प्राथमिकता इंदौर शहर के ट्रैफिक को सुचारू करने के साथ महिला अपराधों पर नियंत्रण करना है.

साथ ही उन्होंने बताया कि उनका डेली रूटीन एक घंटा एक्ससाइज से शुरू होता है. फिर पूरे शहर के अपराधों की जानकारी लेने के बाद वह घर से तैयार होकर ऑफिस निकल जाते हैं. इसके बाद वह रात तक ऑफिस में काम करते हैं. छुट्टियों की बात करें तो वे छुट्टियों में परिवार के साथ कहीं घूमने निकल जाते हैं. उनकी हॉबी की बात करें तो उन्हें शतरंज खेलना काफी पसंद है. छुट्टियों में वे किताबें पढ़ने के साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने बताया कि वे इंदौर में डेली एक्सरसाइज नहीं कर पाते हैं, वे हफ्ते में 3 दिन 1-1 घंटे एक्ससाइज को दे पाते हैं.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान में काफी एनर्जी है 

इंदौर के पुलिस कमिश्नर मकरंद देऊस्कर ने बताया कि जिस समय वे भोपाल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के OSD थे तब उन्हें पता चला कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान में कितनी एनर्जी है. उन्होंने बताया कि प्रदेश में कहीं भी कोई भी समस्या होने पर वह एक्टिव हो जाते हैं. जब वे अपने दौरे से लौटते हैं और उन्हें पता चलता है कि कहीं कोई घटना या कोई परेशानी सामने आ गई है, तो रात के 12 बजे भी वे अधिकारियों को जमा करते हैं और घटना की जानकारी लेकर उसके लिए जरूरी दिशानिर्देश देना शुरू कर देते हैं और जब तक समस्या हल नहीं होती उसकी चिंता करते रहते हैं.

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Dhar SP said Criminals should be so afraid of police that they think 10 times before committing crime
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