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खंडवा लोकसभा सीट का सियासी इतिहास है खास, कांग्रेस-बीजेपी की आंख मिचौली के बीच इस पूर्व सांसद का रहा दबदबा

Khandwa Lok Sabha Seat: खंडवा लोकसभा सीट पर आजादी के बाद कांग्रेस का दबदबा रहा, लेकिन बीते कई वर्षों में यहां बीजेपी का दबदबा देखने को मिला है.

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खंडवा लोकसभा सीट का सियासी इतिहास है खास, कांग्रेस-बीजेपी की आंख मिचौली के बीच इस पूर्व सांसद का रहा दबदबा
ज्ञानेश्वर पाटिल (बांए) खंडवा से वर्तमान सांसद हैं और नंदकुमार सिंह चौहान (दांए) यहां से छह बार सांसद रह चुके हैं.

Khandwa Lok Sabha Seat Political History: मध्य प्रदेश का निमाड़ क्षेत्र (Nimar) में बसा खंडवा जिला (Khandwa), जिसे पूर्वी निमाड़ के रूप में भी जाना जाता है. दरअसल, नर्मदा और ताप्ती नदी (Narmada and Tapti) की घाटियों के बीच बसा यह शहर कभी जैन समुदाय का महत्वपूर्ण स्थान रहा. यहां मिले अवशेषों से पता चलता है कि यहां कभी जैन मंदिर (Jain Temple) हुआ करते थे. 1956 में पूर्वी निमाड़ के रूप में अस्तित्व में आए इस जिले को 2003 में खंडवा (Khandwa) और बुरहानपुर (Burhanpur) के रूप में दो जिलों में विभाजित किया गया. जानकारी के लिए बता दें कि खंडवा का पुराना नाम खांडव वन था. जो कि बोलचाल में धीरे-धीरे खंडवा होता गया और आगे चलकर खंडवा के रूप में ही प्रचलित हुआ.

खंडवा अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन के लिए भी जाना जाता है. 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग इसी जिले में है. इसके अलावा घंटाघर, दादा धूनीवाले दरबार, हरसूद, मूंदी, सिद्धनाथ मंदिर और वीरखाला रूक यहां के अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं.

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इस जिले की सियासत की बात करें तो अनरिजर्वड रही इस सीट पर हुए लोकसभा चुनावों में किसी जमाने में कांग्रेस का बोलबाला रहा, लेकिन बीते कुछ वर्षों से यहां सत्तारूढ़ दल बीजेपी का दबदबा देखने को मिला. अभी तक हुए कुल 19 बार के लोकसभा चुनाव में खंडवा सीट से कांग्रेस ने 9 बार जीत हासिल की, जबकि बीजेपी को 8 बार जीत मिली. वहीं दो बार जनता पार्टी को भी यहां से जीत मिली.

शुरुआती पांच आम चुनावों (1952-71) में कांग्रेस ने पांचों बार खंडवा सीट से जीत का परचम लहराया. इसके बाद 1977 के चुनाव और 1979 के उपचुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार को जीत मिली. हालांकि खंडवा की जनता ने इसके बाद फिर कांग्रेस की वापसी कराई और लगातार दो चुनाव (1980 और 1984) में कांग्रेस प्रत्याशी को जिता कर सांसद बनाया. इसके बाद 1989 में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार इस सीट से जीत हासिल की. हालांकि इसके बाद 1991 के चुनाव में कांग्रेस ने फिर से खंडवा से चुनाव जीता.

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1996 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी  के प्रत्याशी नंदकुमार सिंह चौहान ने जीत दर्ज कर खंडवा लोकसभा सीट पर पार्टी की वापसी कराई. इसके बाद चौहान लगातार (1998, 1999 और 2004) चुनाव जीतते रहे और 2009 तक इस क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व लोकसभा में करते रहे. 2009 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस के प्रत्याशी अरुण यादव के हाथों हार का सामना करना पड़ा. हालांकि 2014 और 2019 के चुनाव को जीतकर नंदकुमार सिंह चौहान ने अपना दबदबा कायम रखा. चौहान के निधन के बाद 2021 में हुए उपचुनाव में बीजेपी के ही उम्मीदवार ज्ञानेश्वर पाटिल ने जीत हासिल की और यहां से सांसद बने. एक बार फिर बीजेपी ने पाटिल पर भरोसा जताते हुए उन्हें लोकसभा का टिकट दिया है.

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