कर्नल कुरैशी पर मंत्री विजय शाह की ‘अमर्यादित' टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख पर कांग्रेस आक्रामक ने आक्रामक रुख इख्तियार कर लिया है. कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से सोमवार को भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में कथित अमर्यादित टिप्पणियों के मामले में उन्हें अपने कैबिनेट सहयोगी विजय शाह से फौरन इस्तीफा लेने की मांग की.
प्रमुख विपक्षी दल ने सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के बाद यह मांग की कि जिनमें राज्य सरकार से कहा गया है कि वह कर्नल कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणियों के लिए मंत्री शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर दो सप्ताह के भीतर फैसला करे.
पूरे देश में हुई थी आलोचना
कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में कहा कि सेना की एक महिला अधिकारी को लेकर शाह की अमर्यादित टिप्पणियों की पूरे देश ने भर्त्सना की थी, लेकिन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता इस मामले में कैबिनेट मंत्री को शुरुआत से बचाने की कोशिश कर रहे हैं. ताजा घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री यादव को शाह का इस्तीफा इसी वक्त ले लेना चाहिए और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देनी चाहिए.
पटवारी ने मंत्री को बचाने का लगाया आरोप
उन्होंने दावा किया कि अगर राज्य सरकार कैबिनेट मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देती है, तो उसका यह कदम अदालत की अवमानना की श्रेणी में आएगा. पटवारी ने कहा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दूसरे लोगों को तो न्याय, मर्यादा और नैतिकता के पालन के बारे में खूब भाषण देते हैं, लेकिन अपने दल के बदजुबान मंत्रियों को बचाने के लिए वे हमेशा हर सीमा पार कर देते हैं.
मंत्री विजय शाह ने दिया था विवादित बयान
पिछले साल सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित होने के बाद शाह आलोचनाओं के घेरे में आ गए थे. इस वीडियो में वह कथित तौर पर कर्नल कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिख रहे थे. कुरैशी ने एक अन्य महिला अधिकारी विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर' की जानकारी मीडिया को दी थी जिसके बाद वह सुर्खियों में आ गई थीं.
कोर्ट ने पहले भी लगाई थी फटकार
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ ‘अपमानजनक' टिप्पणी करने और ‘अभद्र भाषा' का प्रयोग करने के लिए शाह को फटकार लगाई थी और पुलिस को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था. कड़ी आलोचनाओं का सामना करने के बाद कैबिनेट मंत्री ने खेद व्यक्त किया था और कहा था कि वह कर्नल कुरैशी का अपनी बहन से भी अधिक सम्मान करते हैं. शाह के पास जनजातीय कार्य विभाग, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग और भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग हैं.
मंत्री के खिलाफ र्दज हुई थी एफआईआर
इंदौर जिले के रायकुण्डा गांव में शाह ने 12 मई 2025 को हलमा (सामूहिक श्रमदान और सामुदायिक सहभागिता की जनजातीय परम्परा) के सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कथित तौर पर कर्नल कुरैशी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इस बयान पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के खुद संज्ञान लेने के बाद कैबिनेट मंत्री के खिलाफ जिले के मानपुर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने का कृत्य), धारा 196 (1) (बी) (अलग-अलग समुदायों के आपसी सद्भाव पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला ऐसा कृत्य जिससे सार्वजनिक शांति भंग होती हो या भंग होने की आशंका हो) और धारा 197 (1) (सी) (किसी समुदाय के सदस्य को लेकर ऐसी बात कहना जिससे अलग-अलग समुदायों के आपसी सद्भाव पर विपरीत असर पड़ता हो या उनके बीच शत्रुता की आशंका हो) के तहत दर्ज की गई थी.
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