Digvijay Singh Clearification: UGC के नए इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लेकर मचे विवाद के बीच दिग्विजय सिंह ने सफाई दी है. कांग्रेस नेता और संसदीय स्थायी समिति के चेयरमैन ने कहा कि समिति ने ‘फर्जी शिकायत पर सजा' वाले प्रावधान को हटाने और सामान्य वर्ग के छात्रों को नियमों से बाहर रखने की सिफारिश नही की. उन्होंने कहा कि, दोनों फैसले UGC ने अपनी मर्ज़ी से लिए हैं.
फेसबुक पर टिप्पणी करते हुए दिग्विजय सिंह ने खुलासा किया कि समिति के दो बड़े सुझाव UGC ने स्वीकार ही नहीं किए. यूजीसी ने समिति के इक्विटी कमेटियों में SC, ST और OBC की 50% से अधिक भागीदारी और भेदभाव के ठोस विस्तृत उदाहरण नियमों में शामिल करने की उनकी सिफारिश अनदेखा कर दिया. इससे छात्रों में भ्रम और विरोध की स्थिति बनी.
Note on UGC Equity Regulations
— Digvijaya Singh (@digvijaya_28) January 28, 2026
● The mothers of Payal Tadvi and Rohith Vemula - and the prompting of the Supreme Court - Modi Government and the UGC came with draft UGC Equity Regulations in February 2025.
● In December 2025, the Parliamentary Standing Committee on Education…
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UGC के नए नियम को लेकर बढ़ते विरोध के बीच आई सफाई
दरअसल, UGC के नए नियम को लेकर बढ़ते विरोध के बीच पूर्व एमपी सीएम दिग्विजय सिंह ने यह सफाई दी है. उन्होंने कहा कि संसदीय समिति के कुछ महत्वपूर्ण सिफारिश को यूजीसी ने नजरअंदाज किया. उनके मुताबिक झूठे केस दर्ज कराने वाले छात्रों को सजा देने का प्रावधान समिति ने नहीं, बल्कि UGC ने हटाया. उसका समिति से लेना-देना नहीं था.
फर्जी शिकायत पर दंड का प्रावधान हटाना बना विवाद का कारण
गौरतलब है विवाद का बड़ा कारण नए नियमों से फर्जी शिकायत पर दंड का प्रावधान हटाना है, जिसे लेकर विरोध और तीखा हो गया है. कई छात्र संगठनों का कहना है कि स्पष्ट परिभाषा के अभाव में गलत आरोपों का खतरा बढ़ जाता है. उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, UGC ने अंतिम रेगुलेशन में यह दंड प्रावधान हटा दिया, जबकि यह समिति की सिफारिशों में शामिल नहीं था.
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फरवरी 2025 में UGC ने जारी किया था इक्विटी रेगुलेशन का ड्राफ्ट
UGC ने फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और रोहित वेमुला व पायल तड़वी के परिवारों की मांगों के बाद इक्विटी रेगुलेशन का ड्राफ्ट जारी किया था. जिसका उद्देश्य था उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना. दिसंबर 2025 में संसदीय समिति ने ड्राफ्ट की समीक्षा कर सर्वसम्मति से रिपोर्ट दी, जिसमें OBC, दिव्यांगता और भेदभाव की विस्तृत परिभाषा को शामिल करने की स्पष्ट सिफारिशें थीं.
जनवरी 2026 में जारी अंतिम नियमों ने ही विवाद को जन्म दिया
उल्लेखनीय है जनवरी 2026 में जारी अंतिम नियमों ने ही विवाद को जन्म दिया. देशभर में छात्रों का कहना है कि नए प्रावधान भ्रमित करने वाले हैं और कुछ हिस्से “दमनकारी” भी लगते हैं. कई कैंपसों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में नियमों के खिलाफ याचिका भी दायर की जा चुकी है. मौजूदा स्थिति में गेंद UGC और शिक्षा मंत्रालय के पाले में है, जिससे छात्रों को स्पष्टता और सुरक्षा की उम्मीद है.
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