Sheopur Hostel Child Labour: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया है. जिन आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल देने के लिए छात्रावासों में रखा जाता है, वही बच्चे अब पढ़ाई छोड़कर हॉस्टल के काम करते नजर आ रहे हैं. यह मामला आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावास का है, जहां बच्चों से झाड़ू लगवाने और चाय बनवाने जैसे काम कराए जा रहे हैं.
छात्रावास में पढ़ाई नहीं, काम कर रहे बच्चे
श्योपुर जिले के आदिवासी विकासखंड कराहल में संचालित आदिवासी अंग्रेजी बालक छात्रावास में पढ़ने वाले छोटे‑छोटे बच्चे हॉस्टल में काम करते दिखाई दिए. कोई बच्चा सुबह की चाय गैस की भट्टी पर बना रहा है, तो कोई हाथ में झाड़ू लेकर पूरे छात्रावास की सफाई करता नजर आ रहा है. इन दृश्यों ने छात्रावास की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
वीडियो सामने आने से मचा हड़कंप
छात्रावास में बच्चों से काम कराए जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है. बताया जा रहा है कि यह वीडियो करीब तीन दिन पुराना है. वीडियो सामने आने के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही खुलकर सामने आई है, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया है.
स्टाफ होने के बावजूद बच्चों से काम क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब छात्रावास में सफाई कर्मचारी और रसोई के लिए रसोइया पहले से नियुक्त हैं, तो फिर बच्चों से यह काम क्यों कराया जा रहा है. छात्रावास अधीक्षक पर बच्चों की देखरेख और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी होती है, इसके बावजूद बच्चों से मजदूरी जैसे काम कराए जाना गंभीर लापरवाही मानी जा रही है.
सरकारी दावों की खुली पोल
सरकार आदिवासी बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा और सुविधाओं से लैस छात्रावास उपलब्ध कराने के दावे करती है. लेकिन कराहल के इस छात्रावास की तस्वीरें उन दावों की सच्चाई दिखा रही हैं. बेहतर भविष्य के सपने लेकर हॉस्टल में रहने आए बच्चे यहां पढ़ाई की जगह काम करने को मजबूर नजर आ रहे हैं.
जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
वीडियो सामने आने के बाद भी छात्रावास अधीक्षक से लेकर आदिम जाति कल्याण विभाग के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं. न तो किसी तरह की जांच की जानकारी सामने आई है और न ही बच्चों से काम कराए जाने पर कोई सफाई दी गई है.