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विंध्य क्षेत्र का सतना जिला जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित, कलेक्टर ने बिना अनुमति नल कूप खनन पर लगाई रोक

Satna Water Shortage: मध्य प्रदेश के सतना जिले के मोरा, पिंडरा, महाराजपुर, शिवराजपुर, मझगवां, रामनगर खोखला सहित कई गांवों के हैंडपंप बंद पड़े हुए हैं. यहां ग्रामीण बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं. हालांकि गर्मी में बिजली बंद होने की स्थिति में लोगों का इंतजार बढ़ जाता है.

विंध्य क्षेत्र का सतना जिला जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित, कलेक्टर ने बिना अनुमति नल कूप खनन पर लगाई रोक

Satna District Water Scarcity Zone Declared: विंध्य क्षेत्र के सतना जिले में वर्षाकाल के दौरान सामान्य औसत वर्षा से कम बरसात होने और सिंचाई इत्यादि कार्यों में भू-गर्भीय जल का अत्यधिक दोहन होने के कारण जिले के समस्त विकासखण्ड व नगरीय और शहरी क्षेत्रों के नलकूपों औरअन्य जल स्त्रोतों के जल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पेयजल संकट की स्थिति निर्मित होने की संभावना है. जिले में पेयजल संकट की स्थिति पर नियंत्रण के लिए कलेक्टर व जिला मजिस्ट्रेट सतना डॉ. सतीश कुमार एस ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-3 में प्रदत्त शक्तियों के तहत जनहित में सतना (राजस्व) जिले के समस्त विकासखण्डों व नगरीय, शहरी क्षेत्रों को तत्काल प्रभाव से 5 अप्रैल से 30 जून 2026 तक की अवधि के लिए 'जल अभावग्रस्त'क्षेत्र घोषित करने का आदेश जारी किया है. इस अवधि में निजी नलकूप के खनन को पूर्णतः प्रतिबंध किया गया है.

अनुमति के बाद होगा खनन

जारी आदेश में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के जल अभावग्रस्त क्षेत्र में किसी भी शासकीय भूमि पर स्थित जल स्त्रोतों में पेयजल और घरेलू प्रयोजनों को छोड़कर अन्य किसी भी प्रयोजनों के लिये नहरों में प्रवाहित जल के अलावा अन्य स्त्रोतों का जल दोहन किन्ही भी साधनों द्वारा जल का उपयोग नहीं करेगा. जिले के समस्त नदी, नालों, स्टापडैम, सार्वजनिक कुओं और अन्य जल स्त्रोतों का उपयोग घरेलू प्रयोजन के लिये किया जाएगा.

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आदेश में ये भी कहा गया है कि जल अभावग्रस्त क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति स्वयं अथवा प्राईवेट ठेकेदार अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के पूर्व अनुज्ञा प्राप्त किए बिना किसी भी प्रयोजन के लिए नवीन नलकूप का निर्माण नहीं करेगा. यह आदेश शासकीय नलकूप खनन पर लागू नहीं होगा. इसी प्रकार जिन व्यक्तियों को अपनी निजी भूमि पर नलकूप खनन कार्य कराना है, उन्हें ऐसा करने के लिए निर्धारित प्रारूप में निर्धारित शुल्क के साथ संबंधित अनुविभागीय (राजस्व) को आवेदन करना होगा. इस कार्य के लिये समस्त अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को उनके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत सक्षम अधिकारी प्राधिकृत किया गया है. अनुविभागीय अधिकारी अनुमति देने के पूर्व आवश्यक जांच व परीक्षण की जाएगी और अनुमति दिए जाने के संबंध में संबंधित क्षेत्र के सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से अभिमत या अनुशंसा प्राप्त करनी होगी.

नियम विरुद्ध खनन पर होगी कार्रवाई

कलेक्टर के आदेशानुसार, सार्वजनिक पेयजल स्त्रोत सूख जाने के कारण वैकल्पिक रूप से दूसरा कोई सार्वजनिक पेयजल स्त्रोत उपलब्ध नहीं होने पर जनहित में संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) उस क्षेत्र के निजी पेयजल स्त्रोत को “पेयजल परिरक्षण संशोधित अधिनियम 2002 के सेक्सन 4 (ए) और 4 (बी) के प्रावधानों के अधीन अधिग्रहण निश्चित अवधि के लिये कर सकेंगे. आदेश के उल्लंघन करने पर संबंधित के विरूद्ध 'म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 9 व भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 223 के तहत दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी.

गांव-गांव छाया है जल संकट

जिले में गांव-गांव जल संकट छाया हुआ है. अधिकांश डपंप बंद हैं और नल जल कनेक्शन के अभाव में बंद हैं. जिले के मोरा, शिवराजपुर, मझगवां, पिंडरा, महाराजपुर, रामनगर खोखला सहित तमाम गांव के हैंडपंप बंद पड़े हुए हैं. यहां ग्रामीणों की निर्भरता बोरिंग के पानी पर है, लेकिन गर्मी में बिजली बंद होने की स्थिति में लोगों का इंतजार बढ़ जाता है.

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