
MP News in Hindi : ग्वालियर में कोरोना काल के दौरान राशन माफिया ने करीब तीन करोड़ रुपये का राशन डकार गया था. अब इस पूरे मामले का खुलासा हो गया. यह घोटाला जिले की एक सैकड़ा दुकानों के मैनेजरों ने किया था. इन्होंने कोरोना की संकट की घड़ी में सरकारी राशन की दुकानों ने गरीबों के हक पर डाका डालकर सरकारी राशन में छेड़छाड़ करके करोड़ों रुपए की हेराफेरी की. जानें आखिर क्या है पूरा मामला.
99 दुकानों से फूड विभाग वसूली नहीं कर पाया
अब जब यह घोटाला उजागर हुआ, तो प्रशासन ने इन सभी पर मामला दर्ज किया. लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद खाद्य आपूर्ति विभाग सरकारी राशन की कालाबाजारी के बाद भी 99 दुकानों से फूड विभाग वसूली नहीं कर पाया है. अब इनके द्वारा लगभग तीन करोड़ रुपए से भी ज्यादा का खाद्यान्न ठिकाने लगाया गया. यहां के बाद अब इसकी प्रदेशभर में चल रही जांच दो सप्ताह में पूरी होगी.अब ऐसी दुकानों को मिलने वाले कमीशन से वसूली की जाएगी.
सरकारी राशन में हेराफेरी की
ग्वालियर जिले की 99 ऐसी राशन की दुकानें हैं, जिनमें यह घोटाला सामने आया है. इन्होंने गरीबों के हक पर डाका डालकर सरकारी राशन में हेराफेरी की..जिला आपूर्ति नियंत्रक विपिन श्रीवास्तव ने कहा कि दुकानों पर खाद्यान्न के स्टॉक का भौतिक सत्यापन पीओएस मशीन से होगा, ताकि हर महीने अतिरिक्त आवंटन न देना पड़े.अब बकाया राशि की वसूली साल 2020 से 2024 के बीच की कीमत के आधार पर हर महीने मिलने वाले कमीशन से की जाएगी.
यहां से हैं सबसे ज्यादा दुकानें
जिले में जो 99 दुकानों की सूची बनी है. उनमें सर्वाधिक 39 डबरा और 37 भितरवार की हैं. मुरार व घाटीगांव में 8-8 शहरी क्षेत्र में कुल 7 दुकानों शामिल हैं. इन दुकानों को फूड विभाग हर माह उनकी मांग के आधार पर अतिरिक्त आवंटन दे रहा है, इससे कई बार अंतिम दिनों में पहुंचने वाले परिवारों को राशन भी नहीं मिल पाता है.
जिले में कुल 540 राशन दुकानें हैं
4 साल से चल रही इस दिक्कत को दूर करने के लिए विभाग ने दो सप्ताह पहले आदेश जारी किए हैं. इसी आधार पर कलेक्टर जिले में टीम गठित कर रही हैं. विभाग के अनुसार अकेले डबरा में ऐसी दुकानों से 1.26 करोड़ की वसूली होनी है. जबकि जिले में कुल 540 राशन दुकानें हैं, इनमें से 277 शहरी क्षेत्र और 263 ग्रामीण इलाकों में.
जिले में सबसे ज्यादा हेराफेरी की दुकानें डबरा और भितरवार में हैं. बहरहाल सरकारी राशन में हेराफेरी करने वाली इन सभी दुकानों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया. जांच पूरी होने के बाद इन सभी दुकानों को मिलने वाले कमीशन से ही लगभग 3 करोड़ से अधिक की वसूली की जाएगी.
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