OBC Reservation Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में एक बार फिर OBC आरक्षण का मुद्दा सियासी बहस के केंद्र में आ गया है. कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर 27 प्रतिशत OBC आरक्षण को साजिशन खत्म करने की कोशिश का आरोप लगाया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मौजूदा मोहन यादव सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के समय दिया गया आरक्षण अब अदालतों और नीतिगत फैसलों के जरिए कमजोर किया जा रहा है. हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच यह मुद्दा न सिर्फ सियासी, बल्कि सामाजिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है.
कांग्रेस सरकार ने श्री कमल नाथ जी के मुख्यमंत्री रहते हुए OBC वर्ग को 27% आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। लेकिन आज मोहन यादव सरकार करोड़ों रुपये के वकील खड़े कर उसी अधिकार को रोकने में लगी है।
— MP Congress (@INCMP) April 28, 2026
: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी जी. pic.twitter.com/ip8kvUqVPM
कांग्रेस का आरोप: सरकार करोड़ों खर्च कर रोकना चाहती है आरक्षण
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि 2019 में कमलनाथ सरकार ने OBC वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला किया था. उनका आरोप है कि वर्तमान मोहन यादव सरकार इसे लागू होने से रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर महंगे वकील लगा रही है. पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार की मंशा शुरू से OBC आरक्षण को कमजोर करने की रही है.
कमलनाथ बोले: हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई शुरू
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि OBC आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में अब अंतिम और विस्तृत सुनवाई शुरू हो चुकी है. उन्होंने बताया कि उनके मुख्यमंत्री रहते वर्ष 2019 में OBC वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था, लेकिन सरकार गिरने के बाद भाजपा ने इसे लागू नहीं होने दिया. कमलनाथ ने OBC समाज से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि भाजपा किसी भी समय नई रणनीति अपना सकती है.

मध्य प्रदेश में OBC वर्ग को 27% आरक्षण देने के मुद्दे पर हाईकोर्ट में अंतिम और विस्तृत सुनवाई शुरू हो गई है।
— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) April 28, 2026
👉मध्य प्रदेश के OBC वर्ग को वर्ष 2019 में मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल में यह आरक्षण दिया गया था। लेकिन मेरे पद से हटने के बाद से भाजपा OBC आरक्षण की हत्या करने में जुटी…
OBC Reservation: मध्य प्रदेश में आरक्षण को लेकर विवाद
27% आरक्षण का सात साल पुराना विवाद
कमलनाथ ने OBC आरक्षण के पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार गिनाया. उन्होंने कहा कि मार्च 2019 में कांग्रेस सरकार ने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का फैसला लिया था. 19 मार्च 2019 को हाईकोर्ट ने पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेज में इस आरक्षण पर स्थगन दिया, जो केवल कुछ पदों तक सीमित था. बावजूद इसके, जुलाई 2019 में कांग्रेस सरकार ने सभी बाधाएं दूर करने के लिए विधानसभा से 27 प्रतिशत आरक्षण का कानून पास कराया.
सरकार गिरते ही बदला रुख
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार को मार्च 2020 में गिराकर भाजपा सत्ता में आई और तभी से OBC आरक्षण को खत्म करने की साजिश शुरू हुई. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश कुछ पदों तक सीमित था, लेकिन भाजपा सरकार ने उसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया, जिससे 27 प्रतिशत आरक्षण लगभग निष्प्रभावी हो गया.
14% पर भर्ती और 13% होल्ड का फैसला
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि 18 अगस्त 2020 को भाजपा सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट में 14 प्रतिशत आरक्षण के साथ भर्तियां करने का मत रखा. इसके बाद जनवरी 2021 में सरकार ने अदालत से आग्रह किया कि 13 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण को होल्ड पर रखकर भर्ती की जाए. जुलाई 2021 में हाईकोर्ट ने इसी के अनुरूप आदेश भी दिया.
‘भाजपा ने साजिशन खत्म किया 27% आरक्षण'
कमलनाथ ने कहा कि इन सभी फैसलों से साफ है कि भाजपा ने योजनाबद्ध तरीके से 27 प्रतिशत OBC आरक्षण को समाप्त करने का काम किया. उन्होंने चेतावनी दी कि पिछले अनुभवों को देखते हुए इस बार भी OBC वर्ग को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है.
आगे क्या?
हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच सियासत और तेज होने की उम्मीद है. कांग्रेस इस मुद्दे को OBC समुदाय तक लेकर जाने की रणनीति बना रही है, वहीं भाजपा सरकार का कहना है कि वह अदालत के निर्देशों के अनुसार ही काम कर रही है. अब सबकी नजर कोर्ट के फैसले और सरकार के अगले कदम पर टिकी है.
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