
Medical Science: आमतौर पर सरकारी अस्पतालों (Government Hospitals) को लेकर लोगों का नजरिया हमेशा नकारात्मक रहता है. दरअसल, सरकारी अस्पतालों को लेकर समय-समय पर ऐसी तस्वीरें और खबरें सामने आती रहती है, जो सरकारी अस्पताल की व्यवस्था से लोगों का भरोसा कम करती है. मगर कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो इस सिस्टम में भरोसा बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. यानी डॉक्टर को जो भगवान कहा जाता है, इसे वह चरितार्थ कर रहे हैं.
इसकी बानगी पेश करता एक चमत्कारी मामला मध्य प्रदेश के नीमच से सामने आया है. यहां जिला अस्पताल के स्टाफ ने समय पूर्व जन्मे ऐसे बच्चे की जान बचाने में सफलता हासिल की है, जिसके जीने की उम्मीद काफी कम हो चुकी थी. करीब साढ़े छः माह में जन्मे , महज 680 ग्राम वजनी बच्चे को 106 दिनों तक 5 डॉक्टरों की टीम ने कड़ी निगरानी और देखभाल कर बचाने में सफलता हासिल की है.
शॉक और सांस लेने की गंभीर समस्या से पीड़ित था मासूम
दरसल, जिले की जावद तहसील के हनुमंतिया गांव की किरण जटिया की 17 दिसंबर 2024 को समय पूर्व डिलीवरी हुई थी. इस दौरान जन्मे बच्चे का वजन बहुत ही कम यानी 680 ग्राम था. शॉक और सांस लेने की गंभीर समस्या से पीड़ित इस बच्चे को एसएनसीयू जिला अस्पताल नीमच में भर्ती कराया गया था. इस दौरान बच्चे को सिविल सर्जन डॉ. महेन्द्र पाटील के मार्गदर्शन में एसएनसीयू के डॉक्टर और स्टाफ ने एफबीएनसी गाइडलाइन के मुताबिक इलाज शुरू किया. इस टीम में डॉ. प्रशांत राठोर के साथ डॉ. अंकित महेश्वरी, डॉ. श्वेता गर्ग, डॉ. आशीष जोशी, डॉ. योगेंद्र धाकड़ की टीम ने यह असंभव सा लगने वाला कारनामा करके दिखाया. उन्होंने लगातार 106 दिन तक एसएनसीयू में रखकर बच्चे का इलाज किया.
ऐसे हुआ इलाज
डॉ. श्वेता गर्ग ने बताया कि एसएनसीयू में बच्चे को भर्ती के तीसरे दिन से फीड शुरू की गई और 8 वें दिन से बच्चे को प्रति दिन कंगारू मदर केयर दी गई, जो कि लगभग 30 दिन चली. करीब 106 दिन तक शिशु एसएनसीयू में भर्ती रहा. इस दौरान पिछले दिनों लगातार वजन में वृद्धि हुई. साथ ही मां भी दूध पिलाने में सक्षम हो गई. शिशु के पूरी तरह स्टेबल होने के बाद 2 अप्रैल 2025 को डिस्चार्ज किया गया. शिशु की मां किरण एवं परिजनों ने एसएनसीयू के समस्त डॉक्टर एवं नर्सिंग ऑफिसर का आभार व्यक्त किया है.
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शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशान्त राठौर ने बताया कि बच्चे का जन्म समय पूर्व करीब साढ़े छः माह में हुआ था. उस वक्त का उसका वजन मात्र 680 ग्राम था. उन्होंने बताया कि समय पूर्व जन्म के पीछे कई वजह हो सकती है. प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद चिकित्सालय में भर्ती कराया, जहां नॉर्मल डिलीवरी हुई. इसके बाद 5 सदस्यीय डॉक्टरों की टीम ने अथक प्रयास किया और इसकी बदौलत अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है, उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है.
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