Nanaji Deshmukh University: नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर ने पंचगव्य परियोजना पर लगे कथित घोटाले के आरोपों को सिरे से नकार दिया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने रविवार को प्रेस वार्ता कर साफ कहा कि वर्ष 2012 से 2018 तक संचालित “एस्टेब्लिशमेंट ऑफ इंडीजीनस कैटल रिसर्च सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ पंचगव्य प्रोडक्ट्स” परियोजना के तहत किए गए सभी क्रय, व्यय और यात्राएं नियमों के अनुरूप थीं.
प्रशासन का कहना है कि परियोजना का उद्देश्य और कार्यप्रणाली तय मानकों के मुताबिक पूरी की गई है, तथा संबंधित एजेंसियों को पूरी रिपोर्ट भेज दी गई है.
परियोजना की स्वीकृति और लागत
विश्वविद्यालय के अनुसार, यह परियोजना 9 जून 2012 को राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति आरकेव्हीवॉय द्वारा 350 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत की गई थी. इसकी रूपरेखा डॉ. बीपी साहनी ने तैयार की थी और उन्हें ही प्रमुख अन्वेषक नियुक्त किया गया. परियोजना का उद्देश्य स्वदेशी एवं विदेशी संकर गौवंश के मूत्र और गोबर से पंचगव्य उत्पादों का निर्माण और उनका तुलनात्मक अध्ययन करना था.
उद्देश्य पूरा, रिपोर्ट भेजी गई
प्रशासन ने बताया कि परियोजना को निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप पूरा कर लिया गया है. परियोजना समाप्ति के बाद पूरी अध्ययन रिपोर्ट और प्रगति विवरण संबंधित वित्तपोषण एजेंसी को भेज दिए गए हैं. विश्वविद्यालय का दावा है कि शोध और विकास की सभी गतिविधियां तय समय-सीमा और मानकों के अनुसार संचालित हुईं.
क्रय-विक्रय और खर्च
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि परियोजना से जुड़े सभी उपकरण, वाहन और अन्य सामग्री विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार खरीदी गई हैं और वर्तमान में उपयोग में हैं. सभी खर्च मध्यप्रदेश शासन के क्रय-विक्रय नियमों के तहत किए गए. प्रशासन के मुताबिक नियमित ऑडिट कराया गया और समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificates) प्रस्तुत किए गए.
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जांच समिति को सहयोग, रिपोर्ट की प्रतीक्षा
शिकायत के बाद कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति को विश्वविद्यालय ने पूरा सहयोग देने का दावा किया है. प्रशासन का कहना है कि समिति को सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड और आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं. हालांकि, अब तक जांच रिपोर्ट विश्वविद्यालय को प्राप्त नहीं हुई है.
विश्वविद्यालय का पक्ष: आरोप निराधार
प्रेस वार्ता में विश्वविद्यालय ने दोहराया कि परियोजना से संबंधित घोटाले के आरोप निराधार हैं. प्रशासन के अनुसार परियोजना के धन का उपयोग अनुसंधान उद्देश्यों के लिए किया गया और सभी प्रक्रियाएं पारदर्शिता के साथ निभाई गईं. विश्वविद्यालय ने कहा कि जब जांच रिपोर्ट आएगी, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई या स्पष्टीकरण भी सार्वजनिक किया जाएगा.
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