MP Vidhan Sabha Budget Session 2026 Day 8: मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में ही जोरदार प्रदर्शन किया. विपक्ष ने केंद्र सरकार की कथित किसान-विरोधी इंडिया–यूएस ट्रेड डील के खिलाफ नारेबाज़ी करते हुए कहा कि कॉरपोरेट हितों के लिए अन्नदाताओं का बलिदान किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता. प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों के बीच आंतरिक खींचतान के कारण प्रदेश के प्रमुख शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर सहित अन्य नगरीय क्षेत्रों के मास्टर प्लान पिछले डेढ़ साल से लंबित पड़े हैं.
मध्यप्रदेश विधानसभा, बजट सत्र - 08 दिन
— Umang Singhar (@UmangSinghar) February 25, 2026
विधानसभा बजट सत्र के आठवें दिन कांग्रेस विधायक दल के साथ विधानसभा परिसर में किसान विरोधी इंडिया-यूएस ट्रेड डील के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
कॉरपोरेट हितों के लिए अन्नदाताओं का बलिदान स्वीकार नहीं।
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“फाइल मुख्यमंत्री के पास डेढ़ साल से अटकी” : विपक्ष का आरोप
उमंग सिंघार ने दावा किया कि स्वयं नगरीय प्रशासन मंत्री विधानसभा में स्वीकार कर चुके हैं कि मास्टर प्लान की फाइल लंबे समय से मुख्यमंत्री के पास लंबित है. उन्होंने सवाल उठाया कि “सरकार की अंदरूनी खींचतान का खामियाजा जनता क्यों भुगते?” “यह देरी नहीं, बल्कि विकास रोकने वाला निर्णय है.”
मध्यप्रदेश विधानसभा, बजट सत्र - 08 दिन
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मुख्यमंत्री जी, इंदौर, ग्वालियर, भोपाल सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों के मास्टर प्लान आखिर क्यों रोके हुए हैं ? नगरीय प्रशासन मंत्री स्वयं विधानसभा में स्वीकार कर चुके हैं कि फाइल डेढ़ साल से मुख्यमंत्री के पास लंबित है।
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सिंघार के अनुसार भाजपा सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच तालमेल की कमी के कारण नगरीय प्रशासन को न तो फ्री हैंड मिल पा रहा है और न ही ठोस निर्णय लिए जा रहे हैं. नतीजतन, शहरों की विकास योजनाएं ठप पड़ी हुई हैं.
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भाजपा सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच खींचतान का खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है। नगरीय प्रशासन को न फ्री हैंड दिया जा रहा है, न ठोस निर्णय हो रहे हैं नतीजा, डेढ़ साल से शहरों का मास्टर प्लान अटका पड़ा है।
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बड़े शहरों में अवैध कॉलोनियों का बढ़ता फैलाव
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान अटका होने का सीधा लाभ अवैध कॉलोनियों को हो रहा है. उनके अनुसार "इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहर आज भी स्पष्ट विकास योजना का इंतज़ार कर रहे हैं. अवैध कॉलोनियों का निर्माण लगातार जारी है. “सरकार से जुड़े लोग अवैध निर्माण जोड़कर वैध करा लेते हैं” आम नागरिकों के साथ यह स्पष्ट रूप से अन्याय है.
मास्टर प्लान और मेट्रो परियोजनाओं पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि “नगरीय प्रशासन मंत्री को फ्री हैंड क्यों नहीं दिया जा रहा? यदि देना नहीं है तो इस्तीफा ले लो, और यदि मंत्री हैं तो उन्हें काम करने दो. आपसी लड़ाई के कारण मास्टर प्लान अटका हुआ है. जनता को विकास का अधिकार क्यों नहीं?”
विपक्ष का सवाल : क्या जनता को व्यवस्थित विकास का अधिकार नहीं?
सिंघार ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान की देरी सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि सरकार की संवेदनहीनता का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि इंदौर–भोपाल जैसे शहरों को सुव्यवस्थित विकास की तत्काल जरूरत है. लेकिन सरकार की आपसी खींचतान के कारण जनता को नुकसान उठाना पड़ रहा है. विधानसभा परिसर में हुए इस प्रदर्शन के माध्यम से कांग्रेस ने सरकार पर किसानों और शहरी विकास, दोनों क्षेत्रों में विफलता और मित्र-पूंजीवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया.
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