Madhya Pradesh Congress: किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार को आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-52) स्थित खलघाट टोल प्लाजा पर मध्य प्रदेश कांग्रेस द्वारा किए गए चक्काजाम और धरना प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने कांग्रेस के 26 नामजद नेताओं सहित 600 से 700 अज्ञात कार्यकर्ताओं के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है.
पुलिस प्रशासन के अनुसार, इस आंदोलन का प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया और बैनरों के माध्यम से काफी समय पहले से ही किया जा रहा था. वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर धार जिले के खलघाट टोल प्लाजा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. गुरुवार को धार, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी जिलों से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों के साथ खलघाट पहुंचे और सड़क पर वाहन खड़े कर राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया.
पुलिस अधिकारियों द्वारा बार-बार समझाइश और चेतावनी दिए जाने के बावजूद, प्रदर्शनकारी हाईवे से नहीं हटे. प्रदर्शन के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. पुलिस प्रशासन ने साक्ष्य के तौर पर पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी भी करवाई है.
इन नेताओं पर दर्ज हुई एफआईआर
पुलिस ने जिन नेताओं को नामजद किया है, उनमें प्रमुख रूप से विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार (गंधवानी), विधायक प्रताप ग्रेवाल (सरदारपुर), हनी बघेल (कुक्षी), बाला बच्चन (राजपुर), पूर्व विधायक विजय लक्ष्मी साधौ (महेश्वर), झुमा सोलंकी (भीकनगांव), केदार डावर (भगवानपुरा), कांतिलाल भूरिया (झाबुआ), पूर्व विधायक पांचीलाल मेड़ा (धरमपुरी), स्वतंत्र जोशी (जिला अध्यक्ष धार), पूर्व विधायक नवीन जोशी (खरगोन), सचिन यादव (कसरावद), हीरालाल अलावा (मनावर), मोंटू सोलंकी (सेंधवा) और पुरणलाल खरते (बड़वानी) शामिल हैं.
इनके अतिरिक्त जितेंद्र मालीवाड़ (नालछा), अंतिम ढोली (धार विधानसभा प्रभारी), सुभाष सिरसिया (धरमपुरी विधानसभा प्रभारी), विकास पटेल (धामनोद), सुदामा सेन (धरमपुरी), भीम ठाकुर (गुजरी), पवन जायसवाल (धामनोद), संजय पंवार (धामनोद), देवेंद्र पाटीदार (ब्लॉक अध्यक्ष धरमपुरी), सुकराम मकवाना (ग्राम ढाल) और वालसिंह मेड़ा (पूर्व विधायक पेटलावद) के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है.
पुलिस ने सभी आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126(2), 191(2) तथा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 8(ख) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है. फिलहाल पुलिस वीडियोग्राफी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच कर रही है.