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This Article is From May 06, 2026

अब हिन्दी में पढ़िए सिविल इंजीनियरिंग, MP सरकार देगी 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि

Hindi Medium Engineering MP: इंदौर के SGSITS में 2026-27 से हिन्दी माध्यम में सिविल इंजीनियरिंग बीटेक, पढ़ाई पूरी करने पर 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान. पढ़िए पूरी खबर.

अब हिन्दी में पढ़िए सिविल इंजीनियरिंग, MP सरकार देगी 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि
MP में हिन्दी माध्यम से इंजीनियरिंग पढ़ने वालों को मिलेगा 2 लाख रुपए का प्रोत्साहन, SGSITS ने शुरू किया नया कोर्स

MP Higher Education News: मध्यप्रदेश में मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल की गई है. इंदौर स्थित राज्य के प्रतिष्ठित सरकारी इंजीनियरिंग संस्थान श्री जीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) ने हिन्दी माध्यम में सिविल इंजीनियरिंग का बी.टेक. पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है. खास बात यह है कि इस पाठ्यक्रम में अंतिम वर्ष तक हिन्दी माध्यम में पढ़ाई जारी रखने वाले विद्यार्थियों को राज्य सरकार की ओर से दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी. यह योजना न केवल हिन्दी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोलेगी, बल्कि तकनीकी शिक्षा में भाषा की बाधा को भी कम करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है.

हिन्दी माध्यम में बी.टेक. सिविल इंजीनियरिंग

अधिकारियों के अनुसार, एसजीएसआईटीएस 2026-27 के अकादमिक सत्र से चार वर्षीय बी.टेक. (सिविल इंजीनियरिंग) पाठ्यक्रम हिन्दी माध्यम में शुरू करेगा. अभी तक इस संस्थान में यह पाठ्यक्रम केवल अंग्रेजी माध्यम में संचालित होता रहा है.

दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जो विद्यार्थी पूरे चार वर्षों तक हिन्दी माध्यम में अध्ययन करेगा, उसे अंतिम वर्ष में दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को हिन्दी माध्यम चुनने के लिए प्रेरित करना और उन्हें आर्थिक सहयोग देना है.

30 अतिरिक्त सीटों की मंजूरी

फिलहाल एसजीएसआईटीएस में अंग्रेजी माध्यम के सिविल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में 90 सीटें हैं. हिन्दी माध्यम के लिए 30 अतिरिक्त सीटों को स्वीकृति दी गई है. इसके साथ ही अब इस पाठ्यक्रम में कुल 120 विद्यार्थियों को दाखिला मिलेगा, जिससे अधिक छात्रों को तकनीकी शिक्षा का अवसर मिल सकेगा.

1952 से अंग्रेजी में पढ़ाई, अब नई पहल

अधिकारियों ने बताया कि एसजीएसआईटीएस में वर्ष 1952 से बी.टेक. (सिविल इंजीनियरिंग) की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में हो रही है. हिन्दी माध्यम में यह पहला मौका होगा जब इस पारंपरिक तकनीकी पाठ्यक्रम को मातृभाषा में पढ़ाया जाएगा.

पुस्तकों का हिन्दी अनुवाद

संस्थान के विशेषज्ञों की एक टीम पिछले चार वर्षों से अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से मान्यता प्राप्त अंग्रेजी पुस्तकों का हिन्दी में अनुवाद कर रही है. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और मानक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है.

शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण

हिन्दी माध्यम में पढ़ाई को प्रभावी बनाने के लिए एसजीएसआईटीएस के शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशालाओं का आयोजन भी किया गया है. इन कार्यशालाओं में तकनीकी विषयों को हिन्दी में पढ़ाने के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया गया.

राज्य के तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली विद्यार्थी को आगे बढ़ने का अवसर मिले. उनका कहना है कि हिन्दी माध्यम में तकनीकी शिक्षा का यह कदम आने वाले समय में लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा.

गौरतलब है कि चार वर्ष पहले एसजीएसआईटीएस ने बी.टेक. (बायोमेडिकल इंजीनियरिंग) का पाठ्यक्रम भी हिन्दी माध्यम में शुरू किया था, लेकिन बीच में कई विद्यार्थियों के अंग्रेजी माध्यम चुन लेने के कारण यह पहल पूरी तरह सफल नहीं हो सकी. बावजूद इसके, संस्थान ने सिविल इंजीनियरिंग के साथ एक बार फिर यह प्रयोग करने का साहसिक निर्णय लिया है.

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