Singrauli News: जरा सोचिए… जिन कंधों पर पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी है, वही नेता असली और फर्जी सरकारी पत्र में फर्क नहीं कर पाए. मामला सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद के कथित नियुक्ति पत्र से जुड़ा है, जिसने पूरे सियासी गलियारों में हलचल मचा दी. सोशल मीडिया पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के नाम से जारी एक नियुक्ति पत्र तेजी से वायरल हुआ. पत्र में सिंगरौली के एक भाजपा नेता को सिंगरौली विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने का दावा किया गया. फिर क्या था…नेता जी पहुंच गए भाजपा के बड़े दिग्गजों का आशीर्वाद लेने, नेताजी को बधाइयों एवं शुभकामनाओं की बरसात होने लगी.

भाजपा के कई दिग्गज नेता अपने-अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सिंगरौली विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनने की बधाई और शुभकामनाओं वाले पोस्ट शेयर कर रहे थे. सत्ता के गलियारों में 'नई ताजपोशी' का माहौल बनाया जा रहा था, मिठाइयां बांटी जा रही थीं और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही थीं. लेकिन जैसे ही फर्जी नियुक्ति पत्र की सच्चाई सामने आई, वैसे ही बधाइयों की यह सियासी चमक फीकी पड़ गई. जिन नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट कुछ देर पहले शुभकामनाओं से भरे पड़े थे, वहीं बाद में एक-एक कर पोस्ट डिलीट होने लगे. हालांकि पोस्ट हट गए, लेकिन वायरल स्क्रीनशॉट्स ने पूरे घटनाक्रम को हमेशा के लिए सोशल मीडिया की फाइलों में कैद कर दिया.
भाजपा के बड़े नेताओं ने शुभकामनाएं दे डालीं
प्रदेश के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के कई बड़े नेताओं ने फोन, सोशल मीडिया और मुलाकातों के जरिए शुभकामनाएं दे डालीं. इतना ही नहीं, समर्थकों ने मिठाइयां बांटीं, स्वागत हुआ और “नई जिम्मेदारी” के पोस्टर तक लग गए, लेकिन जब नियुक्ति पत्र वायरल हुआ तो पूरा मामला पलट गया. जांच में सामने आया कि वायरल हो रहा नियुक्ति पत्र फर्जी है. ना तो विभाग ने ऐसा कोई आदेश जारी किया था और ना ही सरकार की ओर से कोई आधिकारिक नियुक्ति हुई थी.

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतना बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ कैसे? और उससे भी बड़ा सवाल… क्या सत्ता के बड़े चेहरे बिना सत्यापन किए ही बधाइयां देने में जुट गए?

विपक्ष ने भाजपा नेताओं पर कसा तंज
सिंगरौली से निकला यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है. विपक्ष भी इसे लेकर सरकार और भाजपा नेताओं पर तंज कस रहा है. इस पत्र को लेकर NDTV ने जब पड़ताल शुरू किया तो चौकाने वाला सच सामने आया. NDTV ने पत्र में जारी अध्यक्ष वीरेन्द्र गोयल से बातचीत किया तो उन्होंने बताया कि अभी विभाग से मुझे कोई पत्र नहीं मिला है, लेकिन जिस तरह से प्रदेश के मुखिया से लेकर पार्टी के आलाकमान तक बधाई संदेश दे रहे है, यह तो गलत नहीं हो सकता है न.. यानी वीरेंद्र गोयल की बातचीत से यह साफ समझ मे आता है कि उन्हें भी यह सस्पेन्स है कि यह लेटर फर्जी नहीं हो सकता है.

विभाग ने नहीं जारी किया आदेश
वहीं नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे ने स्पष्ट किया है कि सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद के संबंध में उनके विभाग की तरफ से कोई आदेश जारी नहीं किया गया है. इस त्रुटी को भी भाजपा के बड़े बड़े दिग्गज नेता नहीं समझ पाए...
सोशल मीडिया में वायरल नियुक्ति पत्र में कई त्रुटियां सामने आईं. पत्र का प्रारूप सामान्य सरकारी आदेशों से अलग बताया गया है. साथ ही जिस अधिकारी के हस्ताक्षर दर्शाए गए, उस नाम का कोई संबंधित अधिकारी विभाग में पदस्थ ही नहीं है. सबसे महत्वपूर्ण पत्र में त्रुटि अपर सचिव की जगह अवर सचिव लिखा गया है.
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