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तेंदूपत्ता पर मौसम की मार; वन प्रबंधन ने बढ़ाई तेंदूपत्ता संग्राहकों की चिंता, मानक पत्तों की कमी

Tendu Patta Sangrahan 2026: बलौदा बाजार में तेंदूपत्ता संग्रहण पर मौसम का असर, आधी बूटा कटाई और कम धूप से मानक पत्ते कम, 5500 MSP के बावजूद चुनौती.

तेंदूपत्ता पर मौसम की मार; वन प्रबंधन ने बढ़ाई तेंदूपत्ता संग्राहकों की चिंता, मानक पत्तों की कमी

Tendu Patta Sangrahan 2026: बलौदा बाजार जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण सत्र 2026 की औपचारिक शुरुआत तो हो चुकी है, लेकिन इस बार मौसम की आंख-मिचौली और वन प्रबंधन से जुड़ी नीतिगत फैसलों के चलते संग्रहण कार्य कई चुनौतियों से जूझता नजर आ रहा है. सरकार ने जहां तेंदूपत्ते का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5500 रुपए प्रति मानक बोरा तय कर ग्रामीणों की आय बढ़ाने का संकेत दिया है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि इस बार मार्च–अप्रैल में होने वाली बूटा कटाई आधी कर दी गई, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है. ऊपर से मौसम में लगातार बदलाव, कम धूप और नमी के कारण मानक गुणवत्ता के पत्ते कम निकल पा रहे हैं. ऐसे में जिले में तय 23,500 मानक बोरा खरीदी लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं दिख रहा. हालात का असर सीधे-सीधे संग्राहकों, समितियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.

तेन्दूपत्ता संग्रहण सत्र 2026 की शुरुआत

बलौदा बाजार जिले में वनोपज आधारित आजीविका को गति देने वाला तेंदूपत्ता संग्रहण सत्र वर्ष 2026 शुरू हो गया है. जिला वनोपज सहकारी संघ मर्यादित के अंतर्गत आने वाली 24 समितियों के माध्यम से संग्रहण कार्य संचालित किया जा रहा है. इस सत्र में भी खरीदी की पूरी प्रक्रिया फड़ स्तर पर फड़ मुंशी के जरिए की जा रही है, ताकि संग्रहण और भुगतान में पारदर्शिता बनी रहे.

5500 रुपए MSP, लेकिन हकीकत में मुश्किलें

इस वर्ष छत्तीसगढ़ शासन ने तेंदूपत्ते का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5500 रुपए प्रति मानक बोरा निर्धारित किया है. इससे ग्रामीण संग्राहकों को बेहतर पारिश्रमिक मिलने की उम्मीद है. लेकिन संग्राहकों का कहना है कि मूल्य तय होना एक राहत जरूर है, पर जब पत्ते ही कम निकलेंगे तो आमदनी अपने-आप सीमित हो जाएगी.

Tendu Patta Sangrahan 2026: तेंदूपत्ता संग्रहण 2026

Tendu Patta Sangrahan 2026: तेंदूपत्ता संग्रहण 2026

आधी बूटा कटाई से घटा उत्पादन

ग्रामीणों और संग्राहकों का आरोप है कि इस बार वन क्षेत्र में तेंदूपत्ता के पौधों की मार्च और अप्रैल माह में होने वाली बूटा कटाई आधी ही कराई गई. बूटा कटाई कम होने से नए और कोमल पत्तों की संख्या घट गई है. नतीजतन संग्राहकों को जितने पत्ते मिलने चाहिए, उतने नहीं मिल पा रहे हैं. कई समितियों में हालात ऐसे हैं कि फड़ में महज 2 से 3 दिन ही खरीदी हो रही है.

मौसम बना बड़ी बाधा

इस बार मौसम का मिजाज भी तेंदूपत्ता संग्रहण के अनुकूल नहीं रहा. लगातार बदलते मौसम, बादल, नमी और कम धूप के कारण पत्तों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. संग्राहकों का कहना है कि पत्ते आकार और सूखने की मानक शर्तों पर खरे नहीं उतर पा रहे, जिससे मानक बोरा तैयार करना मुश्किल हो रहा है.

23,500 मानक बोरा का लक्ष्य

जिले में इस वर्ष 23,500 मानक बोरा तेंदूपत्ता खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. जिला वनोपज सहकारी संघ के अंतर्गत 24 समितियों के 16 तेंदूपत्ता लॉट का अग्रिम विक्रय पहले ही किया जा चुका है. विभाग का कहना है कि यदि लक्ष्य पूरा होने के बाद भी अच्छी गुणवत्ता के पत्ते उपलब्ध रहते हैं, तो खरीदी कार्य जारी रखा जाएगा.

संग्राहकों की चिंता

संग्राहकों का कहना है कि विभागीय दावे और जमीनी सच्चाई में बड़ा अंतर है. जहां एक ओर गुणवत्ता की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर बूटा कटाई कम कराकर उत्पादन ही घटा दिया गया. इससे संग्राहकों की मेहनत और संभावित आय दोनों प्रभावित हो रही हैं.

आंकड़े बताते हैं तेंदूपत्ता की अहमियत

तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है. पिछले तीन वर्षों के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं.

  • वर्ष 2025 में 20,114 संग्राहकों ने कुल 11.63 करोड़ रुपए की विक्रय राशि प्राप्त की, जिसमें औसत आय 5,782 रुपए प्रति संग्राहक रही.
  • वर्ष 2024 में 21,952 संग्राहकों को कुल 11.24 करोड़ रुपए मिले.
  • वर्ष 2023 में 17,804 संग्राहकों ने 6.40 करोड़ रुपए की आय अर्जित की.

इन आंकड़ों से साफ है कि हर साल इस कार्य से जुड़ने वालों की संख्या और कुल आय में बढ़ोतरी हुई है.

वनांचल क्षेत्रों में रोजगार का मजबूत जरिया

तेंदूपत्ता संग्रहण वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आजीविका का बड़ा साधन है. इस कार्य में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रहती है. खेती के अलावा यह आय का ऐसा स्रोत है, जो मौसमी बेरोजगारी को काफी हद तक कम करता है.

नियमित निगरानी का दावा

वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर का कहना है कि इस वर्ष संग्रहण कार्य को व्यवस्थित, पारदर्शी और गुणवत्ता के साथ संपन्न कराने के निर्देश दिए गए हैं. सभी फड़ों की नियमित निगरानी की जा रही है और गुणवत्ता मानकों का पालन सख्ती से कराया जा रहा है.

गांव-गांव मुनादी से बढ़ाई जा रही भागीदारी

वन विभाग द्वारा अधिक से अधिक ग्रामीणों को तेंदूपत्ता संग्रहण से जोड़ने के लिए गांवों में मुनादी कराई जा रही है. विभाग का मानना है कि इससे न केवल संग्राहकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी.

वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण सत्र 2026 जिले में सुचारू रूप से शुरू कर दिया गया है. सभी संबंधित अधिकारियों और मैदानी अमले को निर्देश दिए गए हैं कि संग्रहण कार्य पारदर्शी और समयबद्ध हो. उन्होंने बताया कि 24 समितियों के अंतर्गत 16 लॉट का अग्रिम विक्रय हो चुका है और 23,500 मानक बोरा खरीदी का लक्ष्य तय किया गया है. 5500 रुपए प्रति मानक बोरा की दर से MSP दिया जाएगा और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए फड़ स्तर पर सख्त निगरानी रखी जा रही है.

कुल मिलाकर, तेंदूपत्ता पर इस बार MSP की राहत तो मिली है, लेकिन आधी बूटा कटाई और मौसम की मार ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. यदि इन चुनौतियों का समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो तय लक्ष्य हासिल करना और संग्राहकों को अपेक्षित लाभ दिलाना मुश्किल हो सकता है.

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