
MP Gehu Kharidi 2025: जबलपुर जिले में 15 मार्च से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होनी थी, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है. यह देरी धान घोटाले के कारम हुई है, जिसमें 74 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. इस घोटाले में कई लिप्त खरीद समितियों के प्रबंधक और उच्च सरकारी अधिकारी शामिल थे, प्रदेश सरकार द्वारा नए अधिकारियों की पदस्थापना में देरी हो रही है और गेहूं खरीदी की समितियों की घोषणा अब तक नहीं हो पाई है.
गेहूं खरीद प्रक्रिया में देरी, किसानों की बढ़ी चिंता
किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद में हो रही देरी के कारण वो असमंजस में हैं. उन्हें हार्वेस्टर, खाद और अन्य कृषि खर्चों का भुगतान करना है. इसलिए वो मजबूरी में 200-300 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत पर भी अपना अनाज मंडी में बेच रहे हैं. यदि सरकारी खरीद जल्द शुरू नहीं हुई, तो अधिकांश किसान निजी व्यापारियों को ही अपनी उपज बेच देंगे.
जल्द शुरू होगी धान की खरीदी
सरकार का कहना है कि गेहूं की खरीदी जल्द शुरू की जाएगी, लेकिन अब तक सिर्फ 50 प्रतिशत किसानों ने ही अपना पंजीकरण कराया है. 31 मार्च तक पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होनी है, जिसके बाद ही खरीदी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. प्रशासन का दावा है कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं.
क्या इस साल किसानों को मिलेगा समर्थन मूल्य?
धान घोटाले के बाद गेहूं की सरकारी खरीद पर भी सवाल उठ रहे हैं. अब देखना होगा कि इस बार किसान सरकार को अपनी उपज बेचने में कितना भरोसा जताते हैं या फिर बाजार और मंडियों की ओर रुख करते हैं. सरकारी खरीद में देरी और किसानों की आर्थिक मजबूरी इस वर्ष गेहूं व्यापार के समीकरण को बदल सकती है.