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Cabinet Decisions: मोहन सरकार का अस्थायी व स्थायी कर्मचारियों के लिए बड़ा ऐलान, कैबिनेट के प्रमुख फैसले

Cabinet Decisions: अस्थायी व स्थायी कर्मचारियों के लिए अहम निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है. यह योजना वर्ष 2026-27 तक लागू रहेगी. इसके लिए सरकार ने 905 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को मंजूरी दी है. इस योजना के माध्यम से युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे.

Cabinet Decisions: मोहन सरकार का अस्थायी व स्थायी कर्मचारियों के लिए बड़ा ऐलान, कैबिनेट के प्रमुख फैसले
Cabinet Decisions: मोहन सरकार का अस्थायी व स्थायी कर्मचारियों के लिए बड़ा ऐलान, जानिए कैबिनेट के प्रमुख फैसले

Cabinet Decisions MP: भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मोहन कैबिनेट की बैठक संपन्न हो गई है. बैठक के बाद डिप्टी मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी. इस बैठक में विकास, रोजगार, परिवहन और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई. कैबिनेट ने भोपाल और इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बजट आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इससे प्रदेश के दो बड़े शहरों में मेट्रो परियोजना को नई गति मिलेगी और शहरी परिवहन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी.

उद्यम क्रांति योजना जारी रहेगी

मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है. यह योजना वर्ष 2026-27 तक लागू रहेगी. इसके लिए सरकार ने 905 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को मंजूरी दी है. इस योजना के माध्यम से युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे.

कैबिनेट ने वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है. पहले चरण में प्रदेश में 6 वन विज्ञान केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे वन संरक्षण, अनुसंधान और प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलेगा.

इसके अलावा राघवपुर परियोजना के लिए 1782 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. वहीं मुख्यमंत्री सड़क परियोजना के तहत प्रदेशभर में 3810 विकास कार्यों को स्वीकृति मिली है, जिससे सड़क नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा.

बैठक में राज्य सरकार के कर्मचारियों से जुड़े एक बड़े प्रशासनिक सुधार का भी फैसला लिया गया. अब स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के बीच का अंतर समाप्त कर दिया गया है. पहले मौजूद 10 प्रकार के भेद को खत्म कर अब केवल 5 श्रेणियां रखी गई हैं. नियमित, संविदा, आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारी ही श्रेणी में रहेंगे. साथ ही विभाग प्रमुखों को अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने का अधिकार दिया गया है. अब खाली पदों को नियमित रूप से भरा जाएगा. इन फैसलों को प्रदेश के विकास, रोजगार सृजन और प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

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