Cabinet Decisions MP: भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मोहन कैबिनेट की बैठक संपन्न हो गई है. बैठक के बाद डिप्टी मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी. इस बैठक में विकास, रोजगार, परिवहन और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई. कैबिनेट ने भोपाल और इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बजट आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इससे प्रदेश के दो बड़े शहरों में मेट्रो परियोजना को नई गति मिलेगी और शहरी परिवहन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्री परिषद की बैठक वंदे मातरम के सामूहिक गान के साथ आरंभ हुई।
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बैठक में जनकल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।@DrMohanYadav51 #CMMadhyaPradesh pic.twitter.com/K80rsdXWRD
उद्यम क्रांति योजना जारी रहेगी
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है. यह योजना वर्ष 2026-27 तक लागू रहेगी. इसके लिए सरकार ने 905 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को मंजूरी दी है. इस योजना के माध्यम से युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे.
कैबिनेट बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय
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मध्यप्रदेश में नवाचार करते हुए 6 वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इसके लिए ₹48 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।
🔹उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल @DrMohanYadav51 @CMMadhyaPradesh@rshuklabjp @minforestmp #JansamparkMP… pic.twitter.com/xWJBqKFWRM
इसके अलावा राघवपुर परियोजना के लिए 1782 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. वहीं मुख्यमंत्री सड़क परियोजना के तहत प्रदेशभर में 3810 विकास कार्यों को स्वीकृति मिली है, जिससे सड़क नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा.
स्वरोजगार का सपना हो रहा साकार
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मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत आज कैबिनेट में ₹905.25 करोड़ के व्यय की स्वीकृति दी गई है।
योजना के तहत प्रदेश के 18 से 45 वर्ष तक के स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के लिए बैंक के माध्यम से ₹50 हजार से ₹50 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा… pic.twitter.com/YCtzpfG8Mw
बैठक में राज्य सरकार के कर्मचारियों से जुड़े एक बड़े प्रशासनिक सुधार का भी फैसला लिया गया. अब स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के बीच का अंतर समाप्त कर दिया गया है. पहले मौजूद 10 प्रकार के भेद को खत्म कर अब केवल 5 श्रेणियां रखी गई हैं. नियमित, संविदा, आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारी ही श्रेणी में रहेंगे. साथ ही विभाग प्रमुखों को अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने का अधिकार दिया गया है. अब खाली पदों को नियमित रूप से भरा जाएगा. इन फैसलों को प्रदेश के विकास, रोजगार सृजन और प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
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