
Shivraj Wrote letter to Chief Justice of Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Former CM Shivraj Singh Chouhan) ने ग्वालियर में कुलपति (Vice Chancellor) की जान बचाने के लिए जज की कार छीनकर इलाज कराने के मामले में मध्य प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of Madhya Pradesh) को पत्र लिखा है. इस पत्र के माध्यम से पूर्व सीएम शिवराज ने छात्रों के अपराध को मानवीय मूल्यों के आधार पर क्षमा (Pardon to Students) करने की मांग की है. पूर्व सीएम ने कहा कि यह अपराध कुलपति की जान बचाने के पवित्र उद्देश्य के साथ किया गया था. युवकों का भाव किसी तरह का द्वेष या आपराधिक कार्य करने का नहीं था. इसलिए पूर्व सीएम ने जबलपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले को स्वतः संज्ञान में लेने की मांग की है. उन्होंने छात्रों के भविष्य को देखते हुए दर्ज प्रकरण को वापस लेकर छात्रों को क्षमा करने का अनुरोध किया है.
इस पत्र की जानकारी पूर्व सीएम शिवराज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से साझा की. एक्स पर पोस्ट करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने लिखा, "समाचार पत्रों के माध्यम से एक प्रकरण मेरे संज्ञान में आया है कि निजी विश्वविद्यालय के कुलपति जी की जान बचाने के पवित्र उद्देश्य से किए गए अपराध हेतु छात्रों पर प्रकरण दर्ज किया गया है. मैंने माननीय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महोदय को इस संबंध में पत्र लिखकर छात्रों को क्षमा करने तथा प्रकरण वापिस लेने का निवेदन किया है. मुझे विश्वास है कि माननीय उच्च न्यायालय छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर, मानवीय मूल्यों के आधार पर छात्रों को क्षमा प्रदान करेंगे."
समाचार पत्रों के माध्यम से एक प्रकरण मेरे संज्ञान में आया है कि निजी विश्वविद्यालय के कुलपति जी की जान बचाने के पवित्र उद्देश्य से किए गए अपराध हेतु छात्रों पर प्रकरण दर्ज किया गया है।
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) December 15, 2023
मैंने माननीय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महोदय को इस संबंध में पत्र लिखकर छात्रों को… pic.twitter.com/ruehoJzHs7
क्या है पूरा मामला ?
उत्तर प्रदेश के झांसी के एक निजी विश्वविद्यालय के 59 वर्षीय कुलपति प्रो.रणजीत सिंह ट्रेन से दिल्ली से झांसी जा रहे थे. इसी दौरान रास्ते में आगरा क्रॉस करने के बाद उनके सीने में दर्द हुआ जिससे वह बेसुध हो गए. जिसके बाद मुरैना में रेलवे से मदद मांगी गई लेकिन वहां पर स्वास्थ्य संबंधी मदद नहीं मिल सकी. जिस बोगी में कुलपति सवार थे उसी कोच में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य विद्यार्थी हिमांशु स्रोतिया और सुकृत सवार थे.
इन दोनों विद्यार्थियों ने जब कुलपति की हालत देखी तो 108 को फोन कर ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर उतार लिया. ट्रेन से उतार कर जब कुलपति को स्टेशन से बाहर लेकर आए तो पोर्च में हाई कोर्ट जज के इंतजार में कार खड़ी थी. हिमांशु और सुकृत ने बीमार कुलपति को उस कार में बैठा लिया और चालक से अस्पताल पहुंचाने के लिए कहा. इस पर चालक ने कार ले जाने से इनकार कर दिया तो ये दोनों चालक से कार की चाबी लेकर अस्पताल के लिए रवाना हो गए.
कुलपति की नहीं बची जान
हालांकि कुलपति की जान नहीं बच सकी और उनकी मौत हो गई, लेकिन इधर कार छीनने को लेकर इसकी शिकायत कार चालक द्वारा पड़ाव थाने में की गई. जिस पर पड़ाव पुलिस ने हिमांशु और सुकृत के खिलाफ धारा 395 के तहत मामला दर्ज कर लिया और कुछ ही देर में कार को जयारोग्य अस्पताल से बरामद भी कर लिया. हिमांशु और सुकृत को हिरासत में लेकर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. इसे लेकर एबीवीपी के छात्रों ने पड़ाव थाने में बीती रात को धरना प्रदर्शन भी किया, लेकिन पुलिस के समझाने पर वह वापस लौट गए. इधर पुलिस ने हिमांशु और सुकृत को न्यायालय में प्रस्तुत कर जेल पहुंचा दिया.
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