
Ujjain Mahakal Temple: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया. प्रभावशालियों के गर्भ गृह में प्रवेश ओर आम श्रद्धालुओं पर रोक को लेकर उठाए सवाल पर कोर्ट ने अभी फैसला नहीं दिया, लेकिन प्रशासन श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए इसे असंभव बता रहा है. साथ ही नंदी हॉल को भी सशुल्क करने की तैयारी कर रहा है.
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर याचिका दायर
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में करीब दो साल से प्रवेश प्रतिबंध है, लेकिन विशिष्ट या अति विशिष्ट के अतिरिक्त गर्भगृह में प्रभावशाली लोगों के घुसने पर लगातार विवाद होता है. इस बीच इंदौर के दर्पण अवस्थी ने हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार, महाकालेश्वर मंदिर समिति, कलेक्टर,एसपी को पक्षकार बनाते हुए जनहित याचिका दायर की. याचिकाकर्ता के वकील चर्चित शास्त्री ने कोर्ट में कहा कि आम भक्तों के लिए मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक है, लेकिन वीआइपी के नाम पर प्रभावशाली लोग ओर उनके परिजन प्रवेश करते हैं. फिलहाल कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया.
इसलिए आसान नहीं है महाकाल मंदिर के गर्भगृह में सभी को प्रवेश
इस संबंध में मंदिर प्रबंध समिति ओर से कहा जा रहा है कि महाकाल लोक बनने से पहले मंदिर में रोजाना करीब 30 हजार श्रद्धालु पहुंचते थे. अक्टूबर 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद यह संख्या डेढ़ से दो लाख तक पहुंच गई. इतनी संख्या में भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश देना मुमकिन नहीं, इसीलिए मंदिर समिति ने गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगा रखी है.
कोर्ट में यह भी किया दावा
कोर्ट में अभिभाषक शास्त्री ने कहा कि हजारों किमी दूर से आने वाले आम भक्त गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंध होने पर बाहर से दर्शन करने को मजबूर हैं, लेकिन अपात्र प्रभावी लोग गर्भगृह में आसानी से प्रवेश कर रहे हैं और ऐसे समय सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए जाते हैं. यही वजह हैं कि सूचना के अधिकार में गर्भगृह में प्रवेश करने वालों की सूची मांगी तो मंदिर प्रबंधन समिति ने कहा ऐसी जानकारी संधारित नहीं की जाती.
याचिकाकर्ता की कोर्ट से मांग
याचिकाकर्ता ने मांग कि की वीआइपी के नाम पर गर्भगृह में किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाए या ऐसी नीति बनाई जाए जिससे आम भक्त भी गर्भगृह में जाकर बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें. भले ही इसके लिए शुल्क निर्धारित कर दिया जाए.
न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति विनोद कुमार द्विवेदी की युगलपीठ ने इसकी सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया. इसके जारी होने पर स्पष्ट होगा कि गर्भगृह में आम भक्तों को प्रवेश मिलेगा या नहीं?
दो साल पहले लगा था प्रतिबंध
बता दें कि 4 जुलाई 2023 को सावन महीने में श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में आने की संभावना को देखते हुए 11 सितंबर 2023 तक के लिए गर्भगृह बंद किया था. मंदिर समिति ने कहा था कि सावन खत्म होते ही गर्भगृह पुनः आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा. अब दो साल 25 दिन बीतने के बाद भी गर्भगृह नहीं खोला गया है.
प्रभावशाली ऐसे तोड़ते रहे नियम
- 12 मार्च 2023 को इंदौर के विधायक गोलू शुक्ला के बेटे रुद्राक्ष ने को महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा की थी.
- 5 अप्रैल 2023 को कथाकार पंडित प्रदीप मिश्रा ने गर्भगृह में प्रवेश किया था और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी गर्भगृह में पूजा की थी.
- 1 दिसंबर 2023 को शहर के दो एडिशनल एसपी जयंत राठौर और गुरुप्रसाद पाराशर ने सोला पहनकर गर्भगृह में प्रवेश की.
- 8 जुलाई 2024 को भाजपा के प्रदेश संगठन प्रभारी महेंद्र सिंह और उनकी पत्नी ने गर्भगृह में महाकालेश्वर की पूजा-अर्चना की. इस पर श्रद्धालु ही नहीं, पंडे-पुजारी भी नाराज हुए थे.
- 10 अगस्त 2024 को उज्जैन उत्तर के विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा जन्मदिन पर मंडल अध्यक्ष अजय तिवारी के साथ गर्भगृह में पूजन करते दिखाई दिए.
- 10 मार्च 2025 को कल्याणी समूह के प्रमुख अरबपति व्यवसायी बाबा साहेब नीलकंठ कल्याणी और उनकी पत्नी ने बिना अनुमति के गर्भगृह में प्रवेश कर पूजन किया.
- 21 जुलाई 2025 को इंदौर के भाजपा विधायक गोलू शुक्ला अपने बेटे रुद्राक्ष के साथ बिना अनुमति जबरन घुस गए. रोकने की कोशिश करने पर रुद्राक्ष ने कर्मचारी को धमकी दी.