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मध्य प्रदेश में 11 बागी नेताओं ने खूब किया खेला, फ्लॉप होकर भी कहीं बीजेपी तो कहीं कांग्रेस का खेल बिगाड़ा

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कई ऐसे नेताओं को टिकट नहीं दिया, जिन्हें विश्वास था कि, उन्हें पार्टी मौका देगी. दूसरी ओर बीजेपी से भी कई नाराज नेता निर्दलीय होकर मैदान में उतरे थे.

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मध्य प्रदेश में 11 बागी नेताओं ने खूब किया खेला, फ्लॉप होकर भी कहीं बीजेपी तो कहीं कांग्रेस का खेल बिगाड़ा
बागी नेताओं ने कैसे बिगाड़ा कांग्रेस बीजेपी का खेल

Madhya Pradesh Election Results 2023: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव और रिजल्ट काफी दिलचस्प रहा. जनता ने जिस तरह से अपना फैसला बताया है वह सभी के लिए काफी हैरान करने वाले हैं. एग्जिट पोल्स के बाद सामने आए रिजल्ट ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को चौंकाया. जहां बीजेपी को उम्मीद से ज्यादा सीटें मिली. वहीं, सरकार बनाने का दावा करने वाली कांग्रेस तो धराशायी दिखी. कांग्रेस का मानना है कि, राज्य में धरातल एंटी इंकबेंसी दिखी थी. लेकिन जनता का फैसला क्यों अलग है इसकी समीक्षा करनी होगी. हालांकि, कांग्रेस को पार्टी के अंदर चल रहे झगड़े की समीक्षा जरूर करनी चाहिए. वहीं, कांग्रेस को उनके खुद की बागी ने तो नुकसान पहुंचाया ही. साथ ही बीजेपी के बागियों ने भी कांग्रेस का ही बंटाधार कर दिया.

दरअसल, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कई ऐसे नेताओं को टिकट नहीं दिया, जिन्हें विश्वास था कि, उन्हें पार्टी मौका देगी. जब उन्हें मौका नहीं मिला तो वह बागी हो गए और चुनावी मैदान में उतर गए. दूसरी ओर बीजेपी से भी कई नाराज नेता निर्दलीय होकर मैदान में उतरे थे. हम आपको 11 बागी नेताओं के नाम बता रहे हैं जो फ्लॉप रहे लेकिन कांग्रेस और बीजेपी को सीधे-सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाया. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.

बागियों ने कैसे बिगड़ा कांग्रेस का खेल

बुरहानपुर सीट से हर्षवर्धन सिंह

बुरहानपुर सीट पर बीजेपी ने अर्चना को दोबारा मौका दिया जो पिछली बार चुनाव हार गई थी. हालांकि, पूर्व अध्यक्ष और पांच बार सांसद नंद कुमार चौहान के बेटे हर्षवर्धन सिंह बुरहानपुर से टिकट की मांग कर रहे थे. इससे पहले उन्होंने 2019 मे खंडवा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की मांग की थी लेकिन उस वक्त भी उन्हें टिकट नहीं मिला. ऐसे में हर्षवर्धन सिंह बीजेपी से नाराज होकर बुरहानपुर सीट पर निर्दलीय उतर गए. 

बुरहानपुर सीट पर अर्चना को 100397 वोट मिले और वह 31171 वोटों से जीत गए. वहीं, कांग्रेस से ठाकुर सुरेंद्र सिंह को 69226 वोट मिले. जबकि हर्षवर्धन सिंह को 35435 वोट मिले. ऐसे में हर्षवर्धन बीजेपी का तो कुछ नहीं बिगाड़ पाए लेकिन कांग्रेस को ठाकुर सुरेंद्र सिंह को नुकसान पहुंचा गए.

सीधी सीट से केदारनाथ शुक्ला

केदारनाथ शुक्ला सीधी सीट से चार बार विधायक रह चुके थे लेकिन बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया. जबकि इस सीट पर सासंद रीति पाठक को बीजेपी ने उतारा. हालांकि, केदारनाथ शुक्ला से बीजेपी पेशाबकांड की वजह से नाराज थी. वहीं केदारनाथ शुक्ला ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया. 

सीधी सीट पर रीति पाठक को 88664 वोट मिले. वहीं दूसरे नंबर पर कांग्रेस के ज्ञान सिंह रहे जिन्हें 53246. जबकि केदारनाथ शुक्ला को 13856 वोट मिले. यानी केदानाथ शुक्ला बीजेपी के बजाए कांग्रेस का बिगाड़ गए.

मुरैना सीट से राकेश सिंह

राकेश सिंह बीजेपी के पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह के बेटे हैं. बीजेपी ने यहां से रघुराजा कंसाना को उम्मीदवार बनाया जिससे रुस्तम सिंह और राकेश सिंह दोनों बीजेपी से इस्तीफा देकर बीएसपी में चले गए. बीएसपी ने राकेश सिंह को मुरैना सीट से चुनाव लड़ाया. वहीं, रघुराजा कंसाना पहले ज्यातिरादित्य सिंधिया के खेमे से कांग्रेस में थे लेकिन 2020 में बीजेपी में शामिल हो गए.  हालांकि, इस सीट पर कांग्रेस के दिनेश गुर्जर ने बाजी मारी.

कांग्रेस के दिनेश गुर्जर को 73695 वोट मिले तो वहीं, बीजेपी के रघुराजा कंसाना को 53824 वोट मिले जबकि बीएसपी राकेश सिंह को 37167 वोट मिले. यानी यहां राकेश सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार का खेल बिगाड़ दिया.

भिंड सीट से संजीव सिंह

भिंड सीट पर बीजेपी ने सिटिंग एमएलए संजीव सिंह का टिकट काटकर नरेंद्र सिंह कुशवाहा को उतारा. इसके बाद संजीव सिंह बीएसपी में शामिल हो गए. संजीव पहले भी बीएसपी में रह चुके थे. यहां नरेंद्र सिंह कुशवाहा को जीत मिली.

नरेंद्र सिंह कुशवाहा को 66420 वोट मिले. जबकि कांग्रेस प्रत्याशी चौधरी राकेश सिंह को 52274 वोट मिले. जबकि संजीव सिंह को 34938 वोट मिले. यानी संजीव सिंह ने कांग्रेस का खेल बिगाड़ दिया और बीजेपी को फायदा मिला.

सतना सीट से रत्नाकर चतुर्वेदी

रत्नाकर चतुर्वेदी बीजेपी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष थे और सतना सीट से टिकट न मिलने पर वह बीएसपी में शामिल हो गए. सतना से बीएसपी ने रत्नाकर चतुर्वेदी को टिकट दिया. जबकि बीजेपी ने सतना सीट से सांसद गणेश सिंह को टिकट दिया. हालांकि, इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार डब्बू सिद्धार्थ सुखलाल को जीत हासिल हुआ.

डब्बू सिद्धार्थ सुखलाल को 70638 वोट मिले. जबकि बीजेपी के गणेश सिंह को 66597 वोट मिले. जबकि रत्नाकर चतुर्वेदी को 33567 वोट मिले. यानी रत्नाकर ने बीजेपी सांसद गणेश सिंह का खेल बिगाड़ दिया.

राजनगर सीट से घासीराम पटेल

घासीराम पटेल बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष रहे थे लेकिन राजनगर सीट से टिकट कटने के बाद वह बीएसपी के टिकट से चुनाव मैदान में उतरे. वहीं, बीजेपी ने अरविंद पटेरिया को टिकट दिया. जबकि कांग्रेस ने सिटिंग एमएलए नाती राजा पर दांव लगाया. 

राजनगर सीट से बीजेपी उम्मीदवार अरविंद पटेरिया को 66698 वोट मिले. जबकि नाती राजा को 63831 वोट और घासीरा पटेल को 32195 वोट मिले. यानी घासीराम बीजेपी के बजाए कांग्रेस का खेल बिगाड़ गए.

निवाड़ी सीट से नंदराम कुशवाहा

नंदराम कुशवाहा 2021 के उपचुनाव में बीएसपी से बीजेपी में शामिल हुए और पृथ्वीपुर सीट से जीते थे. लेकिन इस बार निवाड़ी सीट पर दावेदारी कर रहे थे. लेकिन बीजेपी ने दो बार के विधायक अनिल जैन को उम्मीदवार बनाया. इसके बाद नंदराम कुशवाहा ने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया. 

निवाड़ी सीट पर बीजेपी के अनिल जैन को फिर जीत हासिल हुई. उन्हें 54186 वोट मिले. वहीं कांग्रेस के अमित राय को 37029 वोट मिले. जबकि तीसरे नंबर पर सपा की मीरा दीपक यादव ने 32670 वोट हासिल किया और चौथे स्थान पर नंदराम कुशवाहा रहे और उन्हें महज 18827 वोट मिले. यानी यहां नंदराम कुशवाहा समेत सपा की मीरा दीपक ने भी कांग्रेस का खेल बिगाड़ा.

टीकमगढ़ सीट से केके श्रीवास्तव

बीजेपी ने टीकमगढ़ सीट से केके श्रीवास्तव को टिकट न देकर राकेश गिरी को टिकट दिया. इसके बाद केके श्रीवास्तव निर्दलीय मैदान में कूद गए. हालांकि, यहां कांग्रेस प्रत्याशी यादवेंद्र सिंह (जग्गू भईया) की जीत हुई.

यादवेंद्र सिंह को 83397 वोट मिले. जबकि बीजेपी के राकेश गिरी को 74279 वोट मिले. वहीं केके श्रीवास्तव को 8672 वोट मिले. यहां केके श्रीवास्तव बीजेपी के राकेश गिरी का खेल बिगाड़ दिया.

नागौद से यादवेंद्र सिंह

नागौद सीट से कांग्रेस ने पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह का टिकट काट दिया और रश्मि सिंह को टिकट दिया. इसके बाद वह बीएसपी से चुनाव मैदान में उतर गए. वहीं, यहां बीजेपी के नागेंद्र सिंह को जीत हासिल हुई.

नागेंद्र सिंह को 70712 वोट मिले. जबकि दूसरे स्थान पर यादवेंद्र सिंह को 53343 वोट मिले. वहीं रश्मि सिंह को 50282 वोट मिले. यानी यादवेंद्र सिंह ने कांग्रेस को सीधा नुकसान पहुंचाया.

डॉ अम्बेडकर नगर सीट से अंतर सिंह

अंतर सिंह डॉ अम्बेडकर नगर सीट से कई बार जीत चुके थे. लेकिन इस बार टिकट न मिलने पर वह निर्दलीय मैदान में उतरे. जबकि कांग्रेस ने रामकिशोर शुक्ला को टिकट दिया. लेकिन यहां बीजेपी के उषा बाबू सिंह ठाकुर को जीत मिली.

उषा बाबू सिंह ठाकुर को 102989 वोट मिले. जबकि अंतर सिंह को 68597 वोट मिले. वहीं, कांग्रेस के रामकिशोर शुक्ला को 29144 वोट मिले. यानी अंतर सिंह ने सीधे कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया है.

आलोट सीट से प्रेमचंद गुड्डू

पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू को कांग्रेस से आलोट सीट पर टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे. वहीं, कांग्रेस ने सिटिंग मनोज चावला को उम्मीदवार बनाया. जबकि इस सीट पर बीजेपी के डॉ. चिंतामणि मालवीय की जीत मिली.

इस सीट पर चिंतामणि मालवीय को 106762 मिले. जबकि प्रेमचंद गुड्डू को 37878 वोट मिले. वहीं कांग्रेस के मनोज चावला को 33565 वोट मिले. यानी प्रेमचंद गुड्डू ने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया.

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