Jainendra Kumar Nigam story: ''मम्मी! मैं पूरी मेहनत करूंगा. कुछ बन के दिखाऊंगा...'' मां के हाथ पर लिखीं ये चंद लाइनें बेटे के संघर्ष, मेहनत और कामयाबी की मिसाल बन गईं. वो बेटा जिसके हाथों में कभी हथकड़ी लगी, सलाखों के पीछे वक्त गुजरा और अब उसके कंधे पर सितारे, माथे पर अशोक स्तंभ और तन पर खाकी वर्दी है. नाम है जैनेंद्र कुमार निगम (Jainendra Kumar Nigam).

Jainendra Kumar Nigam bhind DSP Success Story: माता पिता के साथ जैनेंद्र कुमार निगम.
Jainendra Kumar Nigam story: पिता ने पूछा- DySP नहीं बनना क्या?
Jail to DSP story: मध्य प्रदेश के भिंड जिले छोटे से गांव डोंगरपुरा में जन्मे जैनेंद्र कुमार निगम के दादाजी सुदामलाल बीएसएफ में थे. उनके पिता केशव कुमार भी पढ़े लिखे हैं. जैनेंद्र निगम जब समझदार हुए तो उन्होंने अपने पिता को MPPSC की तैयारी करते थे. उनके पिता ने 1996 से 2000 तक लगातार पांच बार मुख्य परीक्षा दी. इस दौरान पिता केशव ने अपने बेटे जैनेंद्र को MPPSC के बारे में जानकारी दी. वे खुद DySP बनना चाहते थे. लेकिन, कुछ दबंग लोगों ने उनके ऊपर झूठे केस दर्ज करा दिए. फिर बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियों को निभामे ने उनका यह सपना पीछे छू्ट गया. इधर, धीरे-धीरे बड़े हो रहे जैनेंद्र बचपन में तो पढ़ाई में ठीक थे, लेकिन 12वीं के बाद उन्होंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया. जैसे-तैसे BSC पास करने के बाद, जैनेंद्र कुमार निगम ने Government MJS College Bhind में दाखिला लिया, यहां मौहाल मिलने पर जैनेंद्र ने एक बार फिर पढ़ाई शुरू की. 2015 में उन्होंने पुलिस आरक्षक भर्ती परिक्षा पास की और फिजिकल देने का इंतजार करने लगे और जब इसकी बारी आई पिता ने उनसे पूछा कि DySP नहीं बनना क्या? इस सवाल के जैनेंद्र नहीं जा पाए.

DSP Jainendra Kumar Nigam Success Story
Jail to DSP story: सब इंस्पेटर का फिजिकल नहीं दे पाए, शिक्षक खुद नहीं बने

Jainendra Kumar Nigam bhind DSP: दबंगों ने जलाया घर, मारपीट में घायल मां.
Success Story: नौकरी करते हुए क्रैक की सिविल सर्विस और बन गए बड़े साहब, जानिए इनकी कहानी
Bhind DSP Jainendra Nigam: परिवार का बहिष्कार, जेल गए, कश्मीर तक पदयात्रा
14 अक्टूबर 2019 को जैनेंद्र और उनके परिवार की किस्मत एक बार फिर साथ छोड़ गई. दंबगों ने विवाद कर उनके घर को आग लगा दी. लूटपाट की, जमीन पर कब्जा किया गया. परिवार समेत जैनेंद्र के ऊपर झूठे केस दर्ज कराया दिया गए. इनता नहीं, परिवार का बहिष्कार कर दिया गया. साथ ही जैनेंद्र, उनके पिता केशव और भाई को जेल भेज दिया गया. कई दिन जेल में बिताने के बाद फूफा कविलाश और बुआ उर्मिला ने सभी की जमानत कराई. जेल से बाने के बाद जैनेंद्र के दिमाग में बस एक ही चीज थी, कुछ करना है, कुछ बड़ा करना है. पांच दिन बाद उन्होंने फैसला किया कि अपनी अलग छवि और राजनीतिक पार्टी बनानी है. इससे पहले पूरा भारत घूमना है. जेब में न तो पैसे थे और न ही खाने का ठिकाने, बस एक झोला और उसमे दो जोड़ी कपड़े. ये लेकर जैनेंद्र पदयात्रा पर निकल गए. सड़क किनारे जहां जगह मिली सो लिए, जो मिला मांगकर खा लिया. पैदल चलते-चलते और ऐसा करते-करते जैनेंद्र कश्मीर पहुंच गए. लेकिन, समय का चक्र एक बार फिर घूमा और 24 मार्च 2020 को कोरोना के कारण लॉकडाउन लग गया. नतीजन जैनेंद्र आगे नहीं जा पाए, सब कुछ बंद होने के कारण जैसे-तैसे वे वापस अपने गांव लौट आए.

DSP Jainendra Kumar Nigam Success Story: पुलिस की कैद में जैनेंद्र, उनके भाई और पिता.
Motivation story MP police: फिर जेल जाना पड़ा, DySP बनने इंदौर पहुंचे
गांव में रहना आसान नहीं था, MPPSC बहुत पीछे छूट चुका था और पुलिस सुरक्षा में रहना पड़ा रहा था. इसी बीच अप्रैल 2020 में जैनेंद्र के माता-पिता के ऊपर फिर जानलेवा हमला हुआ. घर को आग लगा दी गई. परिवार और जैनेंद्र के ऊपर फर्जी FIR दर्ज की गई. एक बार फिर सभी को जेल भेज दिया गया. जेल में अपराधियों ने जैनेंद्र को भड़काने का प्रयास किया, अपने साथ मिलाने की कोशिश की. जैनेंद्र आठ जनवरी 2021 को जेल से छूटकर बाहर आए गए, लेकिन परिजन जेल में ही बंद थे. जेल से छूटकर बाहर आए जैनेंद्र अब ठान चुके थे कि DySP ही बनना है. अपनी बुआ उर्मिला से पैसे लेकर वे 11 जनवरी 2021 को इंदौर पहुंचे. दो महीने की कोचिंग के बाद ही कोरोना के कारण मार्च 2021 में एक बार फिर लॉकडाउन लग गया. इसके बाद उन्होंने इंदौर में ही रहकर पढ़ाई जारी रखी. 22 मई 2021 को पुलिस ने जैनेंद्र के खिलाफ हत्या के प्रयास (धारा 307) के तहत केस दर्ज कर लिया. लेकिन, इस दिन जैनेंद्र इंदौर में हॉस्टल में लगे सीसीटीवी में नजर आ रहे थे. लेकिन, अभी बहुत कुछ होना बाकी था.

Jainendra Kumar Nigam bhind DSP Success Story: जैनेंद्र निगम ने अस्पताल में भर्ती घायल मां की हथेली पर लिखी कसम.
Jainendra Kumar Nigam: अस्पताल में भर्ती मां की हथेली पर लिखा- DySP बनकर ही वापस आऊंगा

bhind Jainendra Kumar Nigam DSP Success Story
Jainendra Kumar Nigam Success Story: 7 नवंबर 2025: जैनेंद्र बोले- पापा मैं DSP बन गया
मां को दी गई कसम पूरी करने के जैनेंद्र कुमार निगम पूरी मेहनत के साथ पढ़ाई में जुट गए. 2022 में उनका सहायक संचालक (School Education) पद पर चयन हुआ. MPPSC 2023 की परीक्षा दी. मैन्स एग्जाम के दौरान मलेरिया और टाइफाइड से जैनेंद्र बीमार पड़ गए. 11 से 16 मार्च 2024 तक मुख्य परीक्षा देते समय सुबह और शाम को ड्रिप लगवाकर पेपर लिखने गए. परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू में भी जी जान लगा दी. 7 नवंबर 2025 की शाम जब रिजल्ट आया तो उन्हें पिता की वो बात याद आ गई जो उन्होंने 2015 में पुलिस आरक्षक भर्ती का फिजिकल देने जाने पहले कही थी- DySP नहीं बनना क्या? इसके बाद जैनेंद्र ने तुरंत पिता को कॉल कर कहा- पापा मैं DSP बन गया.. इसके बाद कुछ देर के लिए खामोशी छा गई, क्योंकि पिता का भी गला भर आया था. जैनेंद्र ने अपना ही नहीं अपने पिता का भी सपना पूरा किया था. जैनेंद्र अपनी इस सफलता का श्रेय परिजनों, उनके प्रदीप सर श्रीवास्तव के अलावा मित्र अनूप, शैलेंद्र, अंकित, राहुल, यश, आदित्य, छोटू और ग्गिरवल को देते हैं, जिन्होंने यहां तक पहुंचने में उनका हर कदम पर साथ दिया.