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MP Big News : 34 सालों से ₹9000 के लिए लड़ रहे केंद्र सरकार के दो मंत्रालय, अब हाईकोर्ट ने दिया ये आदेश

Indian Railway News : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 साल पुराने एक केस में पूर्व और पश्चिम रेलवे जोन महाप्रबंधक की तरफ से दायर अपील को खारिज कर दिया है.

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MP Big News : 34 सालों से ₹9000 के लिए लड़ रहे केंद्र सरकार के दो मंत्रालय, अब हाईकोर्ट ने दिया ये आदेश

MP Highcourt Decision: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व और पश्चिम रेलवे जोन को हाईकोर्ट से बड़ा झटका मिला है . 34 साल पुराने एक केस में महाप्रबंधक की तरफ से दायर अपील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Steel Authority of India) को ब्याज सहित माल की राशि का भुगतान करें. हाईकोर्ट जस्टिस ए के सिंह ने रेलवे दावा अधिकरण द्वारा साल 2001 में पारित आदेश को न्याय उचित करार दिया है.

ये है मामला 

पूर्व और पश्चिम रेलवे जोन (Eastern and Western Railway Zone) के महाप्रबंधक की तरफ से दायर की गई अपील में कहा गया था कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Steel Authority of India) ने मई 1990 को एक बैगन पिग आयरन दुर्गापुर स्टील प्लांट से लक्ष्मी नगर के लिए बुक किया था. लक्ष्मी नगर पहुंचने पर सेल ने माल उठा लिया था. माल प्राप्त करते समय डिलीवरी बुक में हस्ताक्षर भी किए गए थे. इसके बाद सेल ने माल कम होने की बात करते हुए स्टेशन मास्टर से तौल करने की बात कही. स्टेशन मास्टर ने तौल करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने के लिए कहा था. सेल ने माल की तौल करवाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क नहीं किया और माल उठाकर ले गए. सेल ने 2.28. मीट्रिक टन माल कम बताते हुए रेलवे दावा अधिकरण में प्रकरण दायर कर दिया. रेलवे दावा अधिकरण ने 9199.80 पैसा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के साथ दिए जाने का आदेश जारी कर दिया.

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तौल करना संभव नहीं, क्यों दें मुआवजा ?

याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि निजी साइडिंग में रेलवे की तौल मशीन नहीं होती है. इसके बाद रेलवे दावा अधिकरण में 21 दिन देर से दावा किया गया था. आपत्ति के बावजूद भी न्यायालय के विलंब को स्वीकार कर लिया. एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि सेल सरकारी उद्यम है. माल कम होने का उसने विरोध जताते हुए तौल करवाने की बात कही थी. इसके बाद सेल माल उठाकर ले गया और निजी तौर पर तौल करवाई. तौल में माल कम होने पर रेलवे दावा अधिकरण के समक्ष दावा किया. एकलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए रेलवे दावा अधिकरण के आदेश को बरकरार रखा है.

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