Indore Contaminated Water Case: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति से कई लोगों की मौत के बाद शुक्रवार शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है. जबलपुर प्रवास से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने देर रात मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हाई लेवल की मीटिंग में तगड़ा एक्शन लिया है.
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे नगर निगम प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं. जनस्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

इंदौर दूषित पानी मामला: मुख्यमंत्री मोहन यादव सख्त, नगर निगम आयुक्त हटाए, दो अधिकारी निलंबित
मुख्यमंत्री ने इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को तत्काल हटाकर मंत्रालय में पदस्थ करने के निर्देश दिए हैं. वहीं, लापरवाही के लिए अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
बैठक में इंदौर संभागायुक्त ने बताया कि 28 दिसंबर 2025 को भागीरथपुरा क्षेत्र में उल्टी और दस्त के कई प्रकरण सामने आए थे, जिनका संभावित कारण पेयजल प्रदूषण पाया गया. सूचना मिलते ही नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और इंदौर जिला प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई.
इंदौर प्रशासन ने कुल 13 हजार 444 घरों का सर्वेक्षण किया. इस दौरान 310 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 235 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं. प्रभावित क्षेत्र में 24 घंटे डॉक्टरों की ड्यूटी तय की गई है. रेफरल के लिए 10 एंबुलेंस तैनात की गईं और अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार के लिए विशेष बेड चिन्हांकित किए गए.

इसके साथ ही विशेषज्ञ टीम को मौके पर भेजा गया. शिकायतों के निवारण के लिए 24x7 कॉल सेंटर सक्रिय किया गया है. अब तक 1600 से अधिक जल आपूर्ति के नमूने घरों से लिए जा चुके हैं. प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए सहायता डेस्क भी स्थापित की गई है.
बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी नगर निगमों के महापौरों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों के साथ बैठक कर नागरिकों को साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इंदौर जैसी घटना प्रदेश के किसी भी अन्य शहर में दोबारा नहीं होनी चाहिए.
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि नगरीय निकायों का पूरा अमला जनता की सेहत के प्रति सतर्क और संवेदनशील रहे. जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच समन्वय में कोई कमी नहीं होनी चाहिए. पेयजल या अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़ी किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
बैठक में नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नागरिकों को साफ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जारी दिशानिर्देशों की जानकारी भी दी गई, जिनके पालन के निर्देश मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों को दिए.
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CM Mohan Yadav on Indore water case
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी प्रमुख दिशानिर्देश
• सघन आबादी और 20 वर्ष से अधिक पुरानी पाइपलाइनों का चिन्हांकन
• बार-बार लीकेज वाली पाइपलाइन और सीवर के पास से गुजरने वाली लाइनों का चिन्हांकन
• चिन्हांकित रिसाव की 48 घंटे के भीतर मरम्मत
• जल शोधन संयंत्र (WTP) और उच्च स्तरीय टंकियों की 7 दिन में जांच और सफाई
• सभी WTP, प्रमुख जल स्रोत और टंकियों पर तत्काल जल नमूना परीक्षण
• प्रदूषण पाए जाने पर तुरंत जल आपूर्ति रोकना और वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था
• क्लोरीनेशन सिस्टम की 24x7 निगरानी
• पाइपलाइन लीकेज को लेकर जन जागरूकता अभियान
• जल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों को आपात श्रेणी में रखना
• 24 से 48 घंटे में लीकेज और दूषित जल शिकायतों का निराकरण
• सीएम हेल्पलाइन पर गंदे पेयजल और सीवेज से जुड़ी शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता
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