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This Article is From Feb 24, 2026

Illegal Mining: पहाड़ों का सीना छलनी कर प्रकृति की सुंदरता से खिलवाड़, एमपी में खनन माफिया हुए बेलगाम

हनुमना क्षेत्र की कई लोढ़ी, पातीं, गोपला, मझगवां जैसे दर्जनों ग्राम पंचायत क्षेत्रों में सैकड़ों खदान बड़े पैमाने पर अवैध खनन की गतिविधियों की शिकायतें लगातार मिल रही हैं. आरोप है कि बिना अनुमति और स्वीकृति के यहां खदानें संचालित की जा रही हैं, जिससे राजस्व कोष को करोड़ों की चपत लग रही है. दरअसल, क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली पत्थर पटिया की मांग ज्यादा होने के कारण ट्रकों के जरिए यूपी और बिहार तक परिवहन का सिलसिला जारी रहने की बात कही जा रही है.

Illegal Mining: पहाड़ों का सीना छलनी कर प्रकृति की सुंदरता से खिलवाड़, एमपी में खनन माफिया हुए बेलगाम

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के हनुमना जनपद से अवैध उत्खनन की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. दरअसल, एमपी-यूपी सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में पत्थर की पट्टियों का अवैध कारोबार बेखौफ तरीके से संचालित होने के गंभीर आरोप लगे हैं. स्थानीय सूत्रों और जमीनी पड़ताल में यह दावा किया जा रहा है कि पहाड़ों और जंगलों को छलनी कर बेशकीमती चट्टानों को तोड़ा जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग या तो सुस्त नजर आते हैं या पूरी तरह मौन है.

हनुमना क्षेत्र की कई लोढ़ी, पातीं, गोपला, मझगवां जैसे दर्जनों ग्राम पंचायत क्षेत्रों में सैकड़ों खदान बड़े पैमाने पर अवैध खनन की गतिविधियों की शिकायतें लगातार मिल रही हैं. आरोप है कि बिना अनुमति और स्वीकृति के यहां खदानें संचालित की जा रही हैं, जिससे राजस्व कोष को करोड़ों की चपत लग रही है. दरअसल, क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली पत्थर पटिया की मांग ज्यादा होने के कारण ट्रकों के जरिए यूपी और बिहार तक परिवहन का सिलसिला जारी रहने की बात कही जा रही है.

खनन माफियाओं का काला कारोबार

मऊगंज जिले के हनुमना क्षेत्र अंतर्गत दर्जनों ग्राम पंचायत में बेशकीमती पटिया का काला कारोबार धड़ल्ले से फल फूल रहा है. ये हम नहीं, वहां की तस्वीरें बयां कर रही है. पूरे जंगल और पहाड़ों को इस कदर छलनी करके पत्थरों को चीरकर  नेस्तनाबूद कर दिया गया है. यहां हालत ये है कि जहां देखो चारों तरफ उजड़े पहाड़ और बिखरते जंगल में सिर्फ खाई और गड्ढे दिखाई दे रहे हैं. चट्टानों को तोड़कर पत्थर की पटिया और ढोका का काला कारोबार धड़ल्ले से फल फूल रहा है.

मीडिया टीम देखकर भड़के खनन माफिया के साथी

मामले की संवेदनशीलता तब और बढ़ गई, जब जमीनी हकीकत जानने पहुंची NDTV टीम के साथ तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई. जैसे ही कैमरे मौके पर पहुंचे, मशीनें बंद कर दी गई और कई लोग स्थल छोड़कर भाग निकले. अवैध उत्खनन में लिप्त गाड़ियां, स्थल से भाग खड़ी हुई. इसके बाद कथित रूप से कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्रकारों के साथ झूमाझटकी और हमले की कोशिश की गई. इसके बाद एनडीटीवी संवाददाता किसी कदर वहां से निकलने में भी अपनी भलाई समझी. अगर वह नहीं निकलते, तो किसी भी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था. यह पूरा घटनाक्रम मीडिया की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है.

न प्रशासन का डर और न ही पुलिस का खौफ

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, जब अवैध उत्खनन को लेकर टकराव की स्थिति बनी हो. इससे पहले भी पुलिस और वन विभाग की टीमों के साथ विवाद और हमले की घटनाएं सामने आने के दावे किए जाते रहे हैं. बावजूद इसके, अवैध खनन के विरुद्ध ठोस कार्रवाई कभी नहीं की जाती है.

खनिज विभाग सुस्त और एनजीटी है मस्त

यहां के सबसे अधिक सवाल खनिज विभाग की भूमिका पर उठ रहे हैं. आरोप है कि विभागीय स्तर पर कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति हो रही है. क्षेत्र में सक्रिय खनन माफिया के प्रभाव के चलते सख्त कदमों की कमी की चर्चा आम है. वहीं, NGT की ओर से पर्यावरण संरक्षण के लिए बने नियमों और दिशा-निर्देशों की अनदेखी को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है. खासकर उन प्रावधानों की, जिनका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थिति की संतुलन की रक्षा करना है.

 कलेक्टर ने दिया सख्त कार्रवाई का आश्वासन

जब इस पूरे मामले को लेकर कलेक्टर मऊगंज संजय जैन के संज्ञान में अवैध उत्खनन और पत्रकारों पर हुए हमले के मामले में सख्त निर्देश देते हुए कहा कि कल की घटना पर लगातार हम नजर बनाए हुए हैं. अवैध उत्खनन की जानकारी मिलने पर हमारी लगातार कार्रवाई जारी है. छापे भी मारे जा रहे हैं. जुर्माने भी लगाए गए हैं. साथ ही कई लीज पर एक्शन लेकर निरस्त किए गए हैं. अवैध उत्खनन पर खनन माफियाओं के विरुद्ध सख्त कार्यवाही भी की जाएगी.

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वहीं, पत्रकारों के साथ घटना की जानकारी लगते ही पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी सहित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह ने तत्काल हनुमना थाने में विभिन्न धाराओं में मामला पंजीबद्ध कर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है. वहीं, जब इस पूरे मामले को लेकर एनजीटी प्रभारी के संज्ञान में लाया गया कि पूरे पहाड़ और जंगल में अवैध उत्खनन किया जा रहा है तो आखिर खनन माफियाओं पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है, तो उनके द्वारा यह जवाब देकर अपना पल्ला झाड़ दिया गया कि ये काम खनिज विभाग का है. हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है. यह बयान जहां एक ओर कार्रवाई की संभावना दर्शाता है. वहीं, दूसरी ओर अब तक की निष्क्रियता पर सवालों को भी हवा देता है. पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने वाली संस्थाओं की प्रभावशीलता पर भी चर्चा तेज है, क्योंकि जमीनी स्तर पर उल्लंघनों की खबरें थमने का नाम नहीं ले रहीं.

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